तीन अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड जांच ठप
चिकित्सक न होने से जिला अस्पताल, महिला चिकित्सालय में चार माह से और हर्रैया में अस्पताल का संचालन न होने से ठप पड़ी जांच
- ओपेक चिकित्सालय कैली में संचालित हो रहा सेंटर पर भीड़ के चलते पंजीकरण कराना अनिवार्य
बस्ती। जिला और महिला अस्पताल और हर्रैया में अल्ट्रासाउंड बंद होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इनमें दो में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं तो हर्रैया में अभी अस्पताल शुरू न होने के कारण सेंटर का संचालन नहीं हो रहा है। वहीं ओपेक चिकित्सालय कैली में अल्ट्रासाउंड हो रहा है, लेकिन मरीजों की भीड़ की वजह से पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। जिससे मरीजों का तत्काल अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है।
जिले की आबादी करीब 25 लाख है। इनके स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मेडिकल कॉलेज सहित तीन अस्पताल जिला मुख्यालय पर तो सौ बेड का महिला अस्पताल हर्रैया में है। यहां गर्भवती व पेट तथा अन्य बीमारियों से संबंधित जांच के लिए सोनोग्राफी यानी अल्ट्रासाउंड मशीन तो उपलब्ध है, मगर चार में से तीन बंद है। इसमें दो में रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं तो हर्रैया में अभी चिकित्सालय शुरू न होने के कारण सेंटर बंद है। जबकि जिला चिकित्सालय व महिला अस्पताल प्रशासन की मानें तो करीब 120 से 140 मरीजों का हर दिन अल्ट्रासाउंड होता था। इन अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड बंद होने से इसका लाभ निजी सेंटर उठा रहे हैं।
जिला चिकित्सालय में अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन है, जबकि जिला महिला अस्पताल में भी उच्च गुणवत्ता युक्त मशीन स्थापित की गई है। यही हाल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली का है। तीनों अस्पतालों में से जिला चिकित्सालय व महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण चार माह से अल्ट्रासाउंड ठप है तो इन अस्पतालों का बोझ ओपेक चिकित्सालय कैली पर आ गया है। दूसरी ओर ओपेक चिकित्सालय में भी हर दिन तीस से चालीस मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता है। अब इन दोनों अस्पतालों के बोझ के चलते ओपेक चिकित्सालय कैली में पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। जिससे मरीजों का तत्काल अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है।
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हर्रैया प्रतिनिधि के अनुसार यहां हर दिन करीब तीस से पैंतीस मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए आते हैं, मगर स्थानीय स्तर पर निजी सेंटर न होने के कारण लोगों को फैजाबाद का रुख करना पड़ता है। प्रभारी सीएमओ डॉ. एके गुप्ता ने कहा कि जल्द ही हर्रैया में इस अस्पताल का लाभ लोगों को मिलेगा। अस्पताल संचालित न होने कारण सेंटर बंद हैं।
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बोले, एसआईसी
एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा व सीएमएस महिला डॉ. वीके पांडेय ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद है। शासन को पत्र लिखा गया है। जैसे ही कोई नियुक्ति हुई। यहां सेंटर संचालित होने लगेगा।
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बोले मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि चूंकि अस्पताल में भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में पंजीकरण कराने की जरूरत महसूस की गई। इसके बाद यह नियम लागू कर दिया गया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों का तत्काल अल्ट्रासाउंड होता है, जबकि इमरजेेंसी मरीजों का भी अल्ट्रासाउंड करा दिया जाता है। हर दिन तकरीबन दो सौ मरीज आ रहे हैं।