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Basti News: हफ्ते भर बाद आता है अल्ट्रासाउंड का नंबर, निजी सेंटरों की चांदी

Tue, 23 May 2023 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। जिला चिकित्सालय और महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड तीन साल से बंद है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए ओपेक अस्पताल भेजा जाता है। वहां एक सप्ताह बाद का नंबर मिलता है। परेशान मरीज और तीमारदार निजी सेंटरों पर जाते हैं। हैरानी वाली बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में संचालित अधिकतर सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट नहीं हैं। रजिस्ट्रेशन पेपर पर रेडियोलॉजिस्ट का नाम रहता है, मगर मौके पर कोई और ही अल्ट्रासाउंड जांच करता है।
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रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। जबकि हर दिन महिला में प्रसव वाली करीब 40 से 50 तो जिला चिकित्सालय में 30 से 35 मरीजों को डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए सुझाते हैं। जरूरतमंदों को डॉक्टर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैैली रेफर कर देते हैं, जहां लंबी लाइन है, जिससे मरीजों को हफ्ते भर का नंबर मिलता है।

22 मई को 150 की सूची
ओपेक चिकित्सालय कैली में हर दिन करीब 30 मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता है। 22 मई को यहां 150 की सूची थी, इसमें कुछ को सात दिन बाद का नंबर दिया जा रहा था। यहां तैनात कर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कैली में भर्ती होने वाले मरीजों का यहां वरीयता दी जाती है। इसके बाद रेफर मरीजों का नंबर आता है। यहां पिछले हफ्ते की सूची के लोगों का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। अब 27 मई को इस सप्ताह के मरीजों का नंबर आएगा।
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कैैली पर दो अन्य अस्पतालों का भी भार : प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि ओपेक चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड के लिए भीड़ है। सभी की जांच की जाती है, मगर भीड़ के चलते लोगों को समय दे दिया जाता है। इमरजेंसी के मरीजों का तत्काल अल्ट्रासाउंड होता है, मगर सबसे पहले अस्पताल में भर्ती मरीज सुविधाओं का लाभ पाते हैं। कहा कि कैैली पर दो अन्य चिकित्सालयों के अल्ट्रासाउंड का बोझ है।

केस नंबर एक
जिला अस्पताल से अल्ट्रासाउंड के लिए अपने रिश्तेदार को लेकर पहुंचे पुरानी बस्ती निवासी दीपक ने कहा कि उन्होंने 15 मई को अल्ट्रासाउंड के लिए नंबर लगाया था, जिसकी जांच आज हो रही है। कहा कि गंभीर व इमरजेंसी के मरीजों को यहां नहीं आना चाहिए, क्योंकि यहां भीड़ अधिक है। यहां कोई सुनने वाला ही नहीं है।
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केस नंबर- 2
पचपेड़िया मोहल्ला निवासी अजीम ने बताया कि उनके रिश्तेदार को महिला अस्पताल से अल्ट्रासाउंड के लिए यहां रेफर किया गया है। उनको लेकर आए थे, मगर यहां तो अगले सप्ताह का नंबर दे दिया गया है। ऐसे में मजबूरी है कि निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराएं।
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शहर के निजी सेंटरों पर 700 से 800 रुपये अल्ट्रासाउंड का लिया जाता है। जिला व महिला अस्पताल में चिकित्सकों के आसपास दलाल घूमते रहते हैं, जैसे ही चिकित्सक पर्ची पर अल्ट्रासाउंड लिखते हैंं, यह दलाल सक्रिय हो जाते हैं और मरीज को फंसा कर निजी केंद्र पर पहुंचा देते हैं, जहां इनकी सेटिंग होती है। अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालक इन्हें कमीशन देते हैं।

ज्यादातर अल्ट्रासाउंड केंद्र ग्रामीण इलाकों में
जिले में कुल 119 अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पंजीकरण हुआ है। इनमें करीब 30 सेंटर शहर में हैं, शेष दूरस्थ गांवों में स्थापित हैं। खबर है कि यहां जिस रेडियोलॉजिस्ट के नाम से पंजीकरण होता है वह केवल कागजों में ही काम करते हैं। माह में एक बार आकर हिसाब ले जाते हैं, जबकि सेंटर का संचालन स्वयं संचालक या अन्य कोई करता है। इसका खुलासा भी करीब एक पखवाड़ा पहले हुआ था। एसडीएम हर्रैया व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अमोढ़ा में कार्रवाई की तो नर्सिंग होम तो चल रहा था, मगर कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। उस सेंटर को सील कर दिया गया है।

की गई है अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच : सीएमओ
सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र ने कहा कि अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच की गई है। अभी कई सेंटरों की जांच होनी बाकी है। इसे भी पूरा कर दिया जाएगा। जहां जिस रेडियोलॉजिस्ट के नाम पर सेंटर संचालित हो रहे हैं, यदि जांच में वहां नहीं पाए गए तो संबंधित सेंटर संचालक के खिलाफ कार्रवाई के साथ प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी।
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