छह महीने से नहीं हो रही अल्ट्रासाउंड जांच, बाहर के सेंटरों पर जा रहे लोग
रेडियोलॉजिस्ट एवं सोनोलॉजिस्ट अस्पताल में उपलब्ध नहीं, मरीज परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला अस्पताल में छह महीने से अल्ट्रासाउंड जांच ठप है। यहां रेडियोलॉजिस्ट एवं सोनोलॉजिस्ट की तैनाती ही नहीं है। वर्तमान में अल्ट्रासाउंड कक्ष में मरम्मत कार्य होने की वजह से तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच न होने से मरीज माफिया की चांदी हो गई है। वह ओपीडी से लेकर वार्डों तक घूम रहे हैं।
ओपीडी के मेडिसिन व चेस्ट विभाग में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीजों का आना हो रहा है। इसमें अधिकतर मरीज उदर रोग से दर्द से परेशान रहते हैं। लिवर, किडनी, आंत एवं सीने की बीमारी का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड जांच जरूरी होती है। इस तरह के 30 से 40 मरीजों को प्रतिदिन ओपीडी में अल्ट्रासाउंड जांच लिखी जा रही है। इसके अलावा इमरजेंसी एवं मेडिकल वार्ड में 10 से 12 भर्ती मरीजों को भी प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी जाती है।
इन मरीजों के लिए अस्पताल में इस जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में इन्हें अस्पताल से बाहर जांच करानी पड़ रही है। मरीज माफिया इसका लाभ उठा रहे हैं। उनकी सेटिंग जिम्मेदारों से ऐसी है कि डॉक्टर के चैंबर में ही मरीज को उनके सेंटरों का नाम बता दिया जा रहा है। इसके अलावा मरीज माफिया के एजेंट भी मरीजों के साथ हो ले रहे हैं। बाहर सेंटर पर पहुंचाने के बाद ही वह अस्पताल में आकर दूसरे मरीज पर डोरा डाल रहे हैं।
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बाहर 800 रुपये में हो रही अल्ट्रासाउंड जांच
जिला अस्पताल के तीनों गेट के सामने जांच सेंटरों की भरमार है। मरीज माफिया की इन सेंटरों से लेकर डॉक्टर के चैंबर तक सेटिंग है। डॉक्टर जैसे ही पर्चे पर अल्ट्रासाउंड लिखते हैं, सामने बैठे कुछ लोग बाहर के सेंटर की पर्ची थमा देते हैं या मौखिक पता बताते हैं। इसके बाद एक एजेंट मरीज के साथ हिमायती बनकर उन्हें सेंटर तक पहुंचता है। बाहर जांच सेंटर पर अल्ट्रासाउंड के लिए 800 रुपये लिए जा रहे हैं। जानकार बताते हैं इसमें जिम्मेदारों का भी हिस्सा होता है।
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पहले होती रही अल्ट्रासाउंड जांच
अस्पताल के क्षेत्रीय निदान केंद्र भवन में अल्ट्रासाउंड कक्ष की स्थापना हुई थी। यहां पहले आसानी से जांच भी होती रही। छह महीने पहले यहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट डाॅ. वीके सोनकर अस्पताल को प्रमुख अधीक्षक का चार्ज मिल गया। इससे वह प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने लगे हैं। इधर अल्ट्रासाउंड कक्ष की मरम्मत भी शुरू हो गई। इससे यह व्यवस्था ठप हो गई है।
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कोट
अल्ट्रासाउंड जांच के लिए रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट की मांग शासन से की गई है। भवन की मरम्मत कराई जा रही है। जल्द ही यह व्यवस्था बहाल हो जाएगी।
-डॉ. वीके सोनकर, एसआईसी