लांग रूट पर चलने वाली निजी बसों ने बढ़ाया किराया, ढाई से तीन हजार रुपये में बुक हो रही एक सीट
त्योहार में बढ़ी आवाजाही, ट्रेनों में नो-रूम और दिल्ली तक दौड़ने वाली सरकारी बसों की संख्या कम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। होली पर निजी बसों में यात्रियों की बहार आ गई है। दिल्ली-लखनऊ से ठसाठस यात्री मिल रहे हैं। लांग रूट पर सरकारी बसों की संख्या कम है। त्योहार में आवाजाही बढ़ी तो दिल्ली समेत महानगरों से लौटने वाली ट्रेनों में नो-रूम चल रहा है। ले देकर यात्रियों के लिए आजकल प्राइवेट बस ही सहारा हैं। इस अवसर को भांप ट्रैवल एजेंसियों ने किराया बढ़ा दिया है। यात्रियों का आरोप है कि ढाई से तीन हजार रुपये किराया वसूल कर यात्रियों को दिल्ली से बस्ती, डुमरियागंज और सिद्धार्थनगर तक की यात्रा कराई जा रही है।
बड़े महानगरों में रहने वालों के आवागमन के लिए ट्रेन, बस की सरकारी सुविधा इन दिनों नाकाफी है। विवश होकर लोग निजी बसों को यात्रा का विकल्प बना रहे हैं। ऐसे में अवसर का फायदा उठाते हुए ट्रैवल एजेंसियों ने मुंबई और दिल्ली तक दौड़ने वाली डबल डेकर बसों का किराया बढ़ा दिया है। दिल्ली से बस्ती तक यात्रा कराने के लिए इन बसों में आजकल ढाई से तीन हजार रुपये प्रति व्यक्ति किराया लग रहा है। मुंबई से बस्ती पहुंचने के लिए छह से सात हजार रुपये प्रति व्यक्ति किराया लिया जा रहा है।
बाहर रहकर कमाई करने वालों के लिए महंगा किराया होली के रंग में भंग डाल रहा है। मजबूरी में लोग अधिक किराये का बोझ सहकर अपनों के बीच होली मनाने पहुंच रहे हैं। इन बसों का संजाल बस्ती समेत आसपास के जनपदों के प्रमुख कस्बों से लेकर दिल्ली-मुंबई तक फैला हुआ है। एजेंट एवं ऑनलाइन व्ययात्रियों की बुकिंग की जा रही है। जिले में प्रतिदिन दिल्ली और मुंबई से एक दर्जन बसें फुल होकर पहुंच रही है। हाईवे स्थित टोल प्लाजा और रुधौली, डुमरियागंज, बाघनगर, बांसी आदि प्रमुख कस्बों में इनका ठहराव हो रहा है।
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आ रही यात्रियों से ठसाठस भरी आ रहीं ट्रेनें
मुंबई और दिल्ली से प्रतिदिन यात्रियों से ठसाठस भरकर ट्रेनें आ रही हैं। लखनऊ और गोंडा के बाद ही इन ट्रेनों में सीटें खाली हो रही हैं। दिल्ली और मुंबई से आने वाली गोरखधाम, वैशाली, हमसफर, कुशीनगर एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस आदि ट्रेनें फुल होकर चल रही हैं। रेलवे स्टेशन पर इन ट्रेनों का ठहराव होते ही प्लेटफार्म यात्रियों से भर जा रहा है। परिसर से गेट के बाहर तक यात्रियों की चहल-पहल सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा दिख रही है। सुबह दस बजे तक ट्रेनों के आने का सिलसिला ज्यादा रहता है। इसलिए स्टेशन पर भीड़ बढ़ी रह रही है।
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होली के नाते निजी बसों का किराया बढ़ रहा है। दिल्ली से बस्ती पहुंचने में तीन हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। यात्रियों के पास ट्रेन का विकल्प न होने के कारण मनमानी किराया वसूल किया जा रहा है।
अनूप पांडेय, यात्री
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अक्सर त्योहारों में ट्रेन एवं सरकारी बस की सुविधा फेल हो जाती है। अतिरिक्त इंतजाम न होने से आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। पहले से छुट्टी न मिलने के कारण ट्रेनों में आरक्षण नहीं करा पाते हैं। इसीलिए ज्यादा किराया देकर घर पहुंचते हैं।
नितिन कुमार, यात्री
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कोट
डग्गामार बसों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। किराया निर्धारण से हम लोगों का कोई मतलब नहीं होता है। हम परमिट, डीएल आदि चेक करते हैं। बिना परमिट और फिटनेस के बसों का संचलन अवैध है।
-पंकज सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन