दोपहर के बाद बाजार में उमड़ रही खरीदारों की भीड़, सड़क पर खड़े हो रहे वाहन
दाहिने-बाए कट मारकर निकलने की भी गुंजाइश नहीं, दूर तक दिख रहा जाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर में दिवाली से पहले ट्रैफिक व्यवस्था बेपटरी हो गई। जहां देखो वहीं दुश्वारी। दोपहर बाद तो स्थिति और विकट बन जा रही है। शहर की सड़कों पर वाहनों से निकलना कठिन हो गया है। खरीदारों की भीड़ के आगे आवागमन ठप हो जा रहा है। गली-कूचे से भी निकलने में बहुत झाम है। शहर की ह्दयस्थली पक्के और पुरानी बस्ती पूरा जाम है। तभी तो पत्नी और बच्चों की कार से बाजार चलने की जिद पर घर के मुखिया न बाबा न... कहते हुए मना कर दे रहे हैं।
पांच दिवसीय शरद महोत्सव की शुरुआत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) शुक्रवार से होगी। मगर, शहर का दृश्य एक दिन पहले यानी बृसपतिवार से ही बदल गया है। खरीदारों की भीड़ इस कदर उमड़ रही है कि शहर की सड़कों पर बाइक और कार से चलने लायक नहीं है। गांधीनगर तो भीड़ का हब बन गया है। कंपनीबाग से इंदिरानगर मोड़ तक भीड़ की दशा पूछिए मत। महिलाएं, बच्चे, पुरुष कपड़ा, बर्तन, आभूषण, मिठाई आदि की दुकानों में भरे हैं तो उससे ज्यादा संख्या में लोग सड़क पर घूम रहे हैं।
बाजार आने वाले वाहन दुकान के सामने सड़क के किनारे या बीचोबीच खड़े कर रहे हैं। इससे दस मीटर चौड़ी सड़क गली के रूप में परिवर्तित हो गई है। ज्यों- ज्यों दिन ढल रहा है भीड़ बढ़ती जा रही है। कंपनीबाग से गांधीनगर तक वाहन से आना टेढ़ी खीर साबित हो रही है। नजर दौड़ाने पर दूर तक जाम दिख रहा है। दो किमी की दूरी तय करने में घंटों लग जा रहे हैं। भीड़ के बीच जाम में फंसी गाड़ियों से निकलने वाला धुआं बाजार का वातावरण भी प्रदूषित कर रहा है।
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गली-कूचे से निकलने में और झाम
गांधीनगर मार्ग पकड़ने के लिए दो मुख्य किनारे हैं। पहला रोडवेज तिराहा और दूसरा कंपनीबाग। मगर, भीड़ की वजह से इन चौराहों से इस मार्ग पर पहुंचना कठिन हो गया है। ऐसे में जानकार लोग गली-कूचे का सहारा ले रहे हैं। यहां से वाहन लेकर निकलने में और झाम है। बभनावा गली, महरीखांवा गली, धर्मशाला रोड, त्रिपाठी गली, दरिया खां गली काफी सकरी है। यहां से दो पहिया वाहन ही नहीं निकल पा रहे हैं। यदि भूले-भटके कोई चार पहिया वाहन लेकर इन गलियों में घुस गया तो फिर मुश्किलें और बढ़ जा रही हैं। चार पहिया के चक्कर में दो पहिया भी नहीं निकल पा रही हैं। गली भी जाम का शिकार बन जा रही हैं। यानी इधर-उधर गली से निकलने में भी राहगीरों को काफी सांसत झेलनी पड़ रही है।
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मालवीय मार्ग पर भी सजा बाजार, बढ़ी भीड़
डेढ़ दशक पहले तक मालवीय मार्ग शहर का बाईपास कहा जाता था। मगर, अब यहां भी बाजार जैसी स्थिति हो गई है। तमाम बड़े शोरूम के साथ दुकानें, बैंक आदि है। चौराहा- चौराहा सब्जी, फल एवं दीपावली उपहार की दुकानें सज रही है। इस वजह से इस मार्ग पर भी खरीदारों की भीड़ जुटने लगी है। इससे जाम की स्थिति यहां भी बनी हुई है। शाम ढलते के बाद रात नौ बजे तक फव्वारा तिराहा, बैरियहवा, रौता चौराहा और नेहरू तिराहे पर पर सरकारी बसों के साथ ऑटो, टैक्सी, कार, बाइक जाम में घंटों फंस रहे हैं।
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पुरानी बस्ती क्षेत्र में तो पैदल चलने लायक नहीं
त्योहार के सीजन में पुरानी बस्ती क्षेत्र में तो पैदल चलने लायक नहीं है। जाम के भय से फुटपाथ कारोबारी अपने ठेले आदि को सुबह दस बजते ही लेकर पहुंच जा रहे हैं। ताकि उन्हें जाम का सामना न करना पड़े। दिन में 3 बजे के बाद तो यहां मंगलबाजार, सुर्तीहट्टा, पांडेय बाजार, मेंहदावल रोड, करूआ बाबा चौक पर इस कदर भीड़ बढ़ रही हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जा रहा है। लोग दुकानों के चबूतरे से होकर निकल रहे हैं। सड़क पर ई- रिक्शा, ऑटो, मोटरसाइकिल, कार बुरी तरह उलझे हुए हैं। जिन्हें जाम के झाम से निकलने में काफी वक्त लग जा रहा है।
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आज और जुटेगी भीड़, बाजार में होगी धन वर्षा
शहर में धनतेरस के दिन शुक्रवार को खरीदारों की भीड़ और जुटने की उम्मीद ज्यादा है। इस दिन दुकान- दुकान धन वर्षा होगी। बर्तन, कपड़े, ज्वैलरी और उपहार के दुकान जगह- जगह सज गए हैं। भीड़ जुटने की आहट एक दिन से पहले मिलने लगी है। भीड़ और जाम का माहौल देख कारोबारी काफी गदगद हैं। उनका विश्वास है कि दीवाली इस भीड़ के जरिये ही व्यवसाय का अवसर लेकर आती हैं। इसीलिए शहर में इस दिन रूट डायवर्जन रहेगा। खासकर पक्के और पुरानी बस्ती में लोगों को पैदल ही चलना पड़ेगा।