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Basti News: सिर्फ चालान काटने निकलती है सफेद वर्दी की पुलिस

Sun, 23 Jul 2023 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। शहर की यातायात व्यवस्था होमगार्डों के जिम्मे होकर रह गई है। हर चौराहे पर होमगार्ड डंडे के सहारे दिन भर यातायात संभालते नजर आ रहे हैं। सफेद वर्दी वाली पुलिस गायब है। यदि कहीं दिखे तो समझ लीजिए ड्यूटी नहीं चेकिंग का खेल चल रहा है।
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सड़क के किनारे अपने वाहन पर ही इनका ठहराव होता है। घंटे दो घंटे में ही काम तमाम होने के बाद यह अपने ठिकाने पर हो लेते हैं, और यातायात व्यवस्था फिर होमगार्डों के जिम्मे हो जाती है। यह खेल रोज का है। देहात से शहर आने वाले वाहन चालकों को अक्सर किसी न किसी चौराहे पर चढ़ावा चढ़ाकर ही आगे बढ़ना पड़ता है।
यातायात की दृष्टि से दिन भर व्यस्त रहने वाले शहर में तैनात यातायात पुलिस अपनी ड्यूटी भूल गई है। प्रमुख चौराहों पर वाहनों को सकुशल पार कराने के बजाय सफेद वर्दी वाली पुलिस सिर्फ चालान काटने तक ही सिमटकर रह गई है। इनकी मौजूदगी यातायात की स्थिति ज्यादा खराब होने पर दिखती है या फिर किसी वीआईपी के भ्रमण के दौरान इन्हें मुस्तैद देखा जाता है। वरना अमूमन यह चालान काटने ही निकलते हैं। यदि कहीं सफेद वर्दीधारी दिखे तो समझ लीजिए वह आपके सहयोग में नहीं चालान काटने के लिए तैयार है।
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सड़क के किनारे खुद के वाहन पर ही उनका ठिकाना होता है। यातायात के बीच कुछ होमगार्ड डंडा पटककर वाहनों को रोकते रहते हैं। इसमें से कुछ वाहनों को खड़ा कराकर मोबाइल से ऑन कैमरा फोटो खींच लिया जाता है। फिर वाहन चालक को किनारे बैठे यातायात पुलिस के पास पहुंचने का इशारा कर होमगार्ड दूसरी गाड़ी रोकने में जुट जाते हैं। उधर वाहन चालक सकुचाते अंदाज में सफेद वर्दीधारी के करीब पहुंचकर बोल पड़ता है साहब फोटो खींच लिए हैं।
उधर से उखड़ा हुआ जवाब वाहन चालक को निराश कर देता है। समझदार लोग तुरंत यू-टर्न लेते हुए चढ़ावा चढ़ाने की बात पर आ जाते हैं, फिर क्या कुछ ही देर में चालान करने वाले खुश नजर आने लगते हैं। मोबाइल से फोटो डिलीट कर वाहन चालक को आगे बढ़ने का इशारा मिल जाता है।

यहां दिन भर होमगार्ड, शाम को यातायात पुलिस
शहर के अस्पताल चौराहा, रोडवेज, कंपनीबाग, फव्वारा तिराहा, कटरा पानी टंकी, बड़ेवन, पांडेय बाजार आदि जगहों पर यातायात पिकेट बनाई गई है। यहां दिन भर होमगार्ड ही यातायात व्यवस्था संभालते नजर आएंगे। अस्पताल चौराहा और रोडवेज यातायात की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील है। यहां जाम लगने के आधे एक घंटे बाद यातायात सिपाही किसी तरह मौजूद हो पाते हैं। वरना सामान्य स्थिति पर होमगार्ड ही ड्यूटी संभालते हैं। दिन में 11 बजे तक और फिर शाम को 4 से 7 बजे तक नजारा कुछ और ही होता है।
इस बीच कटरा, अस्पताल चौराहा, रोडवेज, बड़ेवन पर चेकिंग और चालान का खेल चलता रहता है। उल्लिखित स्थानों पर यदि आप अपनी गाड़ी खड़ी कर दी तो आपको पता भी नहीं चलेगा और आपके वाहन का चालान हो जाएगा। पटेल चौक से पचपेड़िया मार्ग पर दिन में कई बार ट्रैफिक पुलिस चेकिंग लगाती है।

67 स्टाफ की तैनाती, फिर भी नहीं दिखाई देते
यातायात पुलिस में कुल 67 स्टाफ की तैनाती है। इसमें एक यातायात प्रभारी, नौ टीएसआई, 27 हेड कांस्टेबल, 30 कांस्टेबल शामिल हैं। इसके अलावा 60 होमगार्ड भी तैनात हैं। इतनी बड़ी संख्या में यातायात टीम प्रतिदिन उतरे तो शहर के किसी भी हिस्से में जाम की समस्या न खड़ी हो। मगर आए दिन आधा शहर जाम में उलझा रहता है। इसके अलावा जनपद के प्रमुख कस्बों में भी यतायात पुलिस स्थायी रूप से तैनात नहीं है। हर्रैया, रुधौली, बनकटी, नगर बाजार, कप्तानगंज, कलवारी, मुंडेरवा, दुबौलिया में किसी विशेष कार्यक्रम के दौरान ही ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी लगती है। सामान्य दिनों में यहां मौजूदगी नहीं रहती है। जबकि इन कस्बों में यातायात का भारी दबाव है।
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दिन में मिलता है भारी वाहनों को प्रवेश
शहर में सुबह नौ बजे के बाद भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक है। मगर यदि चढ़ावा चढ़ाने पर यह भी संभव हो जाता है। स्कूली बच्चों के साथ शहरी आवागमन बहाल होने के दौरान मालवीय मार्ग, गांधीनगर, अस्पताल चौदाहा, दक्षिण दरवाजा आदि स्थानों पर बिल्डिंग मेटेरियल लदी ट्रालियां धड़ल्ले से प्रवेश कराई जाती है। मिनी ट्रक के आकार वाले लोडर वाहन भी प्रवेश पा जाते हैं। इसके लिए एंट्री प्वाइंट पर वाहन चालकों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ता है। पांडेय बाजार में तो भारी वाहनों को भी प्रवेश दे दिया जाता है। सड़क के किनारे यह वाहन लोडिंग अनलोडिंग के लिए घंटों खड़े रहते हैं। सामान्य लोग अपनी कार या बाइक यदि खड़ी किए तो चालान हो जाता है।

पिछले दिनों कटरा में एक मेडिकल स्टोर के सामने अपनी गाड़ी खड़ी कर दवा खरीद रहे थे। इतने में गाड़ी का चालान हो गया। हमें पता भी नहीं चला। शाम को मोबाइल पर मैसेज आया तब जान पाए। -सिबलू पांडेय, पिकौरा।
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हम अपनी कार से पांडेय बाजार बिजली का सामान लेने गए थे। वहां सड़क के किनारे तमाम चार पहिया लोडर गाड़ी खड़ी थी। मैंने भी अपनी गाड़ी जगह देखकर लगा दी। कुछ देर बाद चालान हो गया, इसका पता हमें बाद में चला।
-डबलू प्रसाद, रोडवेज।
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हम अपनी बाइक से शहर आए थे। कागजात घर पर भूल गए थे। बड़ेवन पर होमगार्ड ने गाड़ी रोक ली और फोटो खींच लिया। इशारा किया ट्रैफिक पुलिस से मिलने का। वहां गए थोड़ी सिफारिश के साथ चढ़ावा चढ़ाए बात बन गई।
-दयानंद, मानिकचंद।

बस्ती से लौटते समय पटेल चौक के पास ट्रैफिक पुलिस चेकिंग लगाई थी। गाड़ी के कागजात मांगे गए। हमने केवल डीएल दिखाया। फोटो खींचकर चालान काटने की बात कहीं गई। हमने ले देकर मामला खत्म कराया।
-संतराम, गौरा।

यातायात स्टॉफ पर्याप्त है। शहर में कुल 26 यातायात प्वाइंट बनाए गए हैं। जहां नियमित ड्यूटी लगाई जाती है। होमगार्ड के साथ ट्रैफिक सिपाही भी मौजूद रहते है। चढ़ावा चढ़ाने जैसी बात निराधार है। चेकिंग नागरिकों की सुरक्षा के लिए की जाती है।
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-कामेश्वर सिंह, यातायात प्रभारी।
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