बस्ती। अंग्रेजों के जमाने का बना टाउन क्लब कई दशकों से निखर नहीं पा रहा है। पांच साल पहले इसे संवारने की मुहिम जरूर छिड़ी। मगर, भवन और परिसर हथियाने तक ही सिमट कर रह गया। पुरानी इमारत में आधुनिक लाइब्रेरी और परिसर में अंडर पार्किंग की योजना सब्जबाग बनकर रह गई। यहां न लाइब्रेरी विकसित हुई और न ही अंडर पार्क बन सका।
शहर की ह्दय स्थली पक्केबाग के आंगन में टाउन क्लब है। इस स्थल को यदि संवार दिया जाए तो यहां की रौनक बढ़ जाएगी। ऐसा भी नहीं है कि इसके लिए प्रयास नहीं हुए। मगर, समय के साथ जिम्मेदार भूलते चले गए। पांच साल पहले तक यह स्थल निजी लोगों के संरक्षण में था। भवन और परिसर का मैरिज हॉल के रूप में कामर्शियल उपयोग किया जाता रहा। कुछ सुधिजनों के प्रयास से प्रशासन हरकत में आया तब जाकर नगर पालिका के आधिपत्य में यह भवन और परिसर आ सका।
शुरुआत में क्लब के बाहर हुए अतिक्रमण भी खाली कराए गए। परिसर के चारों तरफ चहारदीवारी हुई और गेट लगाकर सुरक्षित किया गया। योजना बनी कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल के नाम से यहां हाईटेक लाइब्रेरी और गांधीनगर बाजार के लिए अंडर पार्किंग बनाई जाएगी। भवन के सामने परिसर में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की प्रतिमा स्थापित की गई। भवन के मरम्मत एवं रंगरोगन का कार्य भी हुआ। लाइब्रेरी के लिए आलमारी, कुर्सी, टेबल आदि की कुछ हद तक व्यवस्था भी हुई। मगर, 2020 में इस लाइब्रेरी के लोकार्पण के बाद से जिम्मेदार ने मुंह फेर लिया। अब शहर की पुरानी धरोहर के रूप में टाउन क्लब दिन-ब-दिन बदहाल होता जा रहा है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल की ही पुस्तकें नहीं
हिंदी साहित्य के पुरोधा आचार्य रामचंद्र शुक्ल के नाम से खुली लाइब्रेरी में उन्हीं के पुस्तकें नदारद हैं। उनकी एक से दो कृति ही यहां उपलब्ध है। इसके अलावा हिंदी एवं अंग्रेजी साहित्य की अच्छे लेखकों के पुस्तकों की कमी है। प्रतियोगी किताबों की उपलब्धता बिल्कुल नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी पुस्तकों के साथ यहां आना पड़ता है। उनके लिए यहां सिर्फ बैठने भर की व्यवस्था है। वह भी केवल 15 से 20 लोगों के लिए। यदि इससे ज्यादा संख्या हैं तो बाहर ही घूमना पड़ता है।
सफाई कर्मी और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं
टाउन क्लब की सफाई के लिए कर्मचारी तक नहीं है। यहां के कर्मचारी के रूप में केवल एक पुस्तकालय अध्यक्ष की तैनाती है। नियमित झाड़ू न लगने से लाइब्रेरी में गंदगी की परत जमी हुई है। इसके अलावा पूरे परिसर में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। विद्यार्थियों को प्यास बुझाने के लिए बंद बोतल खरीदना पड़ता है।
टाउन क्लब को निखारने की बीडीए ने बनाई योजना
पिछले माह बस्ती विकास प्राधिकरण की बैठक में टाउन क्लब को नया स्वरूप देने का प्रस्ताव लाया गया है जिस पर सहमति बनी है। बीडीए यहां आधुनिक कॉमन हाल का निर्माण कराने के साथ परिसर में अंडर ग्राउंड पार्किंग बनाने की योजना तैयार करने में जुट गई है। इस योजना को अमलीजामा पहना पाना अभी कठिन लग रहा है। क्योंकि बीडीए के पास धन नहीं हैं।
नहीं हो पा रही सांस्कृतिक गतिविधियां
टाउन क्लब में सांस्कृतिक गतिविधियां भी नहीं कराई जा रही हैं। इससे यह स्थल वीरान लगता है। जबकि परिसर में टी नशेड का बड़ा सभागार बनाया गया है। इसमें अक्सर ताला लगा रहता है। यदा कदा कुछ सरकारी कार्यक्रम आयोजित कर रस्म अदायगी पूरी कर ली जा रही है।
नगर पालिका से सफाई कर्मचारी की डिमांड की गई है। पीने के पानी की समस्या से भी उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जहां तक पुस्तकों के उपलब्धता की बात है तो इसके लिए समाज के सक्षम लोगों से संपर्क किया जा रहा है।
अमित कुमार शुक्ल, पुस्तकालय अध्यक्ष।
प्राधिकरण की बैठक में टाउन क्लब को विकसित करने के प्रस्ताव पर मुहर लगी है। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। यहां कान हॉल और अंडर ग्राउंड पार्किंग के निर्माण के लिए योजना तैयार की जाएगी।
संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए