- सिविल जेल समेत दस गांवों में चली पड़ताल, अब नोटिस देने की शुरू कार्रवाई
- प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए शुरू हुई जोरतोड़, बैनामे के आधार पर भी है लोगों का कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर व आसपास के गांवों में नजूल की जमीनों का चिह्नांकन कार्य पूरा कर लिया गया है। सदर तहसील की तीन टीमों ने लगातार पड़ताल कर नजूल की जमीनों को ब्योरा जुटा लिया है। एक-एक गाटे की नवैयत तक परख ली गई है। कहां किसका किस तरह का कब्जा है यह विवरण भी एकत्र कर लिया गया है। लगभग 300 नजूल भूखंडों की रिपोर्ट तहसील में तैयार हो चुकी है। अब आगे की कार्रवाई के लिए यह पत्रावली तहसीलदार स्तर से अग्रसारित होकर एसडीएम सदर के कार्यालय में पहुंच गई है।
नजूल जमीनों की खोजबीन शुरू होते ही कब्जेदारों में हड़कंप मच गया है। शुरुआती दौर में सिविल लाइन क्षेत्र के दस कब्जेदारों को नोटिस भी जारी किया जा चुका है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर नजूल जमीनों पर लोगों का अवैध कब्जा पाया गया है। तहसील स्तर पर गठित तीन टीमों ने सिविल लाइन क्षेत्र, तुरकहिया, लैबुड़वा, बेलवाडाड़ी, कटरा, मड़वानगर, खीरी घाट, बस्ती खास आदि मौजों में राजस्व अभिलेख में दर्ज नजूल भूखंडों को भू- नक्शा से मिलान कर चिह्नित किया गया। प्रति नजूल भूखंड की नवैयत भी परखी गई है। तीनों टीमों ने लगभग तीन सौ नजूल भूखंडों के स्थलीय सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया है। इसमें कब्जे की प्रकृति भी दर्शाई गई है। जिन जमीनों पर सरकारी संस्थाओं का कब्जा है उसे अलग श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा जिन नजूल भूखंडों पर निजी लोगों ने कब्जा किया है उसे अलग श्रेणी में रखा गया है। अब इन जमीनों के स्वामित्व को लेकर प्रशासन आगे की कार्रवाई करने की जुगत में है। इन जमीनों पर काबिज लोगों से कब्जे के आधार से संबंधित जवाब तलब किया जा रहा है। इससे समूचे शहर के कब्जेदारों में हड़कंप मची हुई है।
स्थलीय सत्यापन के दौरान राजस्व अभिलेखों में सिविल गांव के रूप में दर्ज सिविल लाइन क्षेत्र में सर्वाधिक नजूल भूखंड है। यहां सरकारी आवास, कार्यालय के अलावा निजी लोगों के भी अवैध कब्जे बरकरार हैं। एसडीएम सदर के स्तर से दस कब्जेदारों को नोटिस भी दी जा चुकी है। इसी के बाद से अन्य कब्जेदारों के होश उड़े हैं।
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रजिस्ट्री के आधार पर भी कब्जा
नजूल की भूखंडों पर कब्जा पचास से सौ साल पुराने भी मिले हैं। तमाम भूखंडों पर बैनामें के आधार पर लोगों ने मकान, दुकान बनवाया है। इससे स्पष्ट है कि नजूल भूखंडों पर कब्जा दखल से पहले राजस्व अभिलेखों में हेरफेर हुआ है। इसी के आधार पर नजूल भखंडों के बैनामे हो गए। अब वर्तमान कब्जाधारकों की बैनामा कराने के बाद निर्माण करने की दलील को इन्कार नहीं किया जा सकता है। ऐसे कब्जेदारों की संख्या ज्यादा हैं। जिन्हें निर्माण के लंबे समय के बाद यह पता चल पाया है उनका भूखंड नजूल श्रेणी में है।
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जिलाधीश के नाम दर्ज है नजूल की जमीन
सिविल लाइन क्षेत्र में पुराना डाकखाना, एसपी आवास के सामने नजूल की जमीनें विभिन्न गाटों के रूप में खतौनी में जिलाधीश के नाम पर दर्ज है। मौके पर कब्जा अन्य लोगों का है। इन जमीनों पर पुराने समय से आवासीय एवं कामर्शियल निर्माण है। प्रशासन की सख्ती यदि बढ़ी तो कब्जेदार न्यायालयों की शरण भी ले सकते हैं।
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कोट
नजूल भू- संपत्तियों का ब्योरा संकलित कर लिया गया है। तहसील की तीन टीमों ने लगातार सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की है। इसमें सबकुछ स्पष्ट कर दिया गया है। किसका किस तरह का कब्जा है यह तक इंगित है। पत्रावली एसडीएम सदर को प्रेषित कर दी गई है।
विनय प्रभाकर, तहसीलदार सदर
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नजूल जमीनों पर हुए अवैध कब्जे की रिपोर्ट आ चुकी है। सभी कब्जेदारों को नोटिस भेजी जाएगी। जवाब में उनके प्रस्तुत दस्तावेज एवं दलीलों का अवलोकन किया जाएगा। इसके बाद अगली कार्रवाई होगी।
शत्रुहन पाठक, एसडीएम सदर