जो रोज बनाती हैं सैकड़ों का भोजन, उनके बच्चे भूखे
चार माह से जिले की 5,831 रसोइयों को नहीं मिला मानदेय
बस्ती। परिषदीय स्कूलों में 1.7 लाख बच्चों के लिए भोजन पकाने वाली रसोइयों के खुद के बच्चे भूखे हैं। उन्हें चार माह से मानदेय नहीं मिला है। जबकि शासन ने हर माह की एक तारीख को रसोइयों के बैंक खाते में मानदेय की रकम भेजने का निर्देश दे रखा है।
जिले में कार्यरत 5,831 रसोइयों को दो हजार रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। इसके लिए शिक्षा विभाग का 1,16,62,000 रुपये हर माह खर्च होता है। अप्रैल से रसोइयों को मानदेय नहीं मिला है। इससे उनके समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है। एक रसोइया ने बताया कि बेटे की तबीयत खराब है, लेकिन रुपये न होने से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। फिर भी शिक्षा विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
मिड-डे मील रसोइया कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष केके तिवारी ने बताया कि अधिकारी छोटे कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। रसोइयों को समय पर मानदेय नहीं दिया जा रहा है। उन्हें घर खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। 25 और 26 सितंबर को संघ का दूसरा राज्य स्तरीय सम्मेलन होगा है। इसमें आगे की रणनीति की चर्चा की जाएगी।
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कोट
रसोइयों के मानदेय के लिए शासन से बजट का आवंटन मिल गया है। सप्ताह भर में बकाया मानदेय का भुगतान करा दिया जाएगा।
-अमित मिश्रा, जिला समन्वयक, मिड-डे मील
जिले में 2076 परिषदीय स्कूल
जिले में 2076 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें 1430 प्राथमिक, 324 उच्च प्राथमिक और 322 संविलियन विद्यालय हैं। दो लाख 44 हजार बच्चें पंजीकृत है। एमडीएम बनाने के लिए जिले में 5,831 रसोइयों की नियुक्ति की गई है। नियम के अनुसार एक से 25 विद्यार्थी संख्या तक एक रसोइया, 26 से 100 तक दो रसोइया, 101 से 200 तक तीन रसोइया, 201 से 500 तक चार रसोइया तथा 501 से 1000 विद्यार्थी संख्या तक अधिकतम पांच रसोइयों की नियुक्ति की जा सकती है।