विभाग से अब तक महज चार मिलों का हो पाया है अनुबंध
चेनुआ, मंंडेरवा व जगदीशपुर में नहीं शुरू हुई खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। धान क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं। खरीद शुरू हुए 21 दिन से अधिक का समय बीत गया है। मगर, उपज खरीद में तेजी नहीं आ पा रही है। इसकी वजह विभाग से मिलाें का अनुबंध न होना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जनपद में 131 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनसे ही किसानों की उपज खरीदी जा रही है। एक नवंबर से शुरू हुई खरीद में अब तक 2344 मीट्रिक टन उपज खरीदी जा चुकी है। मंगलवार को क्रय केंद्रों का जायजा लेने पर खरीद सुस्त होने की स्थितियाें को जानने का प्रयास किया। ज्यादातर क्रय केंद्रों के प्रभारियों ने बताया कि खरीदा गया अनाज अभी मिल संचालक नहीं ले जा रहे हैं। गोदाम फुल होने के डर से भी केंद्र प्रभारी खरीद से कतरा रहे हैं।
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तीन समितियों पर शुरू नहीं हुई खरीद
बनकटी। क्षेत्र के बाघापार चेनुआ, मुंडेरवा, जगदीशपुर में खरीद शुरू नहीं हुई है। जबकि खोरिया बसौढ़ी में एक किसान से 36 क्विंटल 40 किलो, महथा सजहरा में दो किसानों से 176 क्विंटल, सजनाखोर में एक किसान से 40 क्विंटल, परासी में एक किसान से 11 क्विंटल, अमानाबाद टिकरिया में एक किसान से 89 क्विंटल 40 किलो, चिताखोर में एक किसान से 72 क्विंटल 40 किलोग्राम धान की खरीद की गई है। भिटहा में चार किसान और मेहरड़ा में एक किसान से 21 क्विंटल 20 किलो धान खरीदा गया है। समिति के सचिवों ने बताया कि मिल संचालकों से अनुबंध नहीं हुआ है। इससे खरीद कम की जा रही है। ज्यादा खरीद करने पर गोदाम में रखने की जगह नहीं बचेगी।
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21 दिनों में महज 16 किसानों से हो सकती खरीद
बभनान। खाद्य विभाग की ओर से सेमरा में क्रय केंद्र बनाया गया है। यहां 21 दिन में महज 16 किसानों का ही धान तौला गया है। क्रय केंद्र पर उपज बेंचने के लिए 80 किसानों ने पंजीकरण कराया है। मंगलवार को क्रय केंद्र पर पहुंचे राम अभिलाख ने बताया कि धान में हल्दिया रोग लगा था। केंद्र प्रभारी खरीद से इन्कार कर रहे हैं। क्रय केंद्र प्रभारी तरुण मिश्रा ने बताया केंद्र पर उपज बेचने के लिए पंजीकरण कराए किसानों को उनका नंबर आने पर सूचित किया जाता है। रोग ग्रस्त धान खरीद के लिए निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।
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तहसीलों से समय पर अभिलेख को नहीं किया जा रहा सत्यापन
बनकटी क्षेत्र के किसान राजेंद्र चौधरी व ओम प्रकाश शुक्ला ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद अभिलेख तहसील के पोर्टल चला जाता है। जहां से अभिलेख को सत्यापित करने के बाद ही पंजीकरण पूरा माना जाता है। तहसील से सत्यापन कराने के लिए काफी दौड़-भाग करनी पड़ रही है।
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वर्जन-
खरीद में तेजी लाने के निर्देश केंद्र प्रभारियों को दिए गए हैं। विभाग से 30 मिलों को संबद्ध किया गया है। अब तक चार मिल से अनुबंध हो पाया है। अन्य मिल संचालकों से संपर्क कर अनुबंध करने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही खरीद में तेजी आएगी।
अजय प्रताप सिंह, डिप्टी आरएमओ