ह्रदयरोग, गैस्ट्रो, नेफ्रो व न्यूरो विभाग का अब तक नहीं खुला ताला
इमरजेंसी में 24 घंटे जांच की सुविधा नहीं दे सका अस्पताल प्रशासन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं की कमी है। एक तो चिकित्सक नहीं हैं, उस पर यहां इमरजेंसी में न तो जांच की व्यवस्था है और न अल्ट्रासाउंड व सिटी स्कैन की। ऐसे में आपातकाल में मरीजों को बाहर का सहारा लेना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि अस्पताल अभी सुपर स्पेशलिटी सुविधा नहीं पा सका है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात नहीं हो सके हैं।
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली अब भी तमाम सुविधाओं के न होने के कारण उपयोगी साबित नहीं हो पा रहा है। यहां ह्रदयरोग विभाग नहीं खुल सका है। जबकि बीच में कुछ दिन एक चिकित्सक की तैनाती अस्पताल प्रशासन ने की थी, मगर उन्होंने नौकरी छोड़ दी। तब से इस व्यवस्था को मेडिसिन विभाग संभाल रहा है।
अस्पताल के महत्वपूर्ण विभाग गैस्ट्रो, न्यूरो व नेफ्रा यानी किडनी रोग विभाग में अब तक चिकित्सक ही नहीं आ सके। हालांकि मरीजों को यहां ओपीडी में देखकर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में गोरखपुर व लखनऊ ही मरीजों का सहारा बने हुए हैं।
चिकित्सकों की मानें तो अस्पताल की इमरजेंसी सेवा भी कमरा और एसी के साथ बेड लगाकर संचालित किया जाता है। क्योंकि इमरजेंसी में न तो वेंटिलेटर है, न जांच की कोई सुविधा। अचानक जरूरत पड़ने पर ऑक्सजीन तक के लिए सिलिंडर का उपयोग यहां होता है। जबकि नियमानुसार इमरजेंसी में पैथोलॉजी व अन्य जांच 24 घंटे होनी चाहिए।
सीएमएस डॉ. एएन प्रसाद ने कहा कि चूंकि अस्पताल अभी सुपर स्पेशलिटी नहीं हो सका है। ऐसे में गैस्ट्रो, नेफ्राे, न्यूरो व हार्ट के चिकित्सक नहीं मिल सके हैं। इसकी मांग शासन से की गई है। रही इमरजेंसी में सुविधाओं की बात तो व्यवस्था की जा रही है।
चिकित्साधिक्षक व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल यादव ने कहा कि यह सही है कि इमरजेंसी में सुविधाएं नहीं हैं। मगर इसी सप्ताह यहां सबकुछ शुरू हो जाएगा। इमरजेंसी के लिए अलग से डायग्नोटिक सेटअप स्थापित कराया जा रहा है। सबकुछ तैयार है। शीघ्र ही पूर्वांचल का अत्याधुनिक इमरजेंसी कैली हो जाएगा।