महिला अधिकारी दुष्कर्म के प्रयास का मामला : पूरी हुई जांच, आरोपी अफसर के साथ बलरामपुर के तीसरे व्यक्ति के मारपीट की चर्चाएं तेज
- तीन महिला अधिकारियों की टीम कर रही प्रकरण की जांच
- महिला अफसर के आवास में तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी के संकेत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। नायब तहसीलदार पर दुष्कर्म का प्रयास और हत्या की कोशिश का मामला उलझ गया है। महिला अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी में दिलचस्पी न दिखाना सवाल खड़ा कर रहा है। इन सबके बीच घटनाक्रम में तीसरे शख्स की मौजूदगी को लेकर चर्चाएं भी तेज हैं। प्रशासन मानकर चल रहा है कि केस में अन्य पहलू हैं, जो अभी सामने नहीं आए हैं। इसके लिए जांच कराई जा रही है।
एसडीएम सदर गुलाबचंद्र ने भी बताया कि मामला त्रिकोणीय लग रहा है, लेकिन ज्यादा कुछ बताने के बजाय वह पुलिस की जांच रिपोर्ट सामने आने की बात कहकर टाल गए। एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि सीओ के नेतृत्व में गठित टीम की रिपोर्ट आने का इंतजार है। इसमें सभी पक्षों के बयान पूरे नहीं हो पाए हैं।
उधर, विभागीय चर्चाओं के मुताबिक बलरामपुर जिले में तैनाती के दौरान उतरौला का रहने वाला एक व्यक्ति महिला अधिकारी के संपर्क आया था। बतौर प्राइवेट कर्मचारी वह तहसील में काम करता था। बस्ती जिले में तबादले के बाद भी महिला अफसर के संपर्क में रहा। बताया जाता है कि वह दिवाली की रात घटना के समय मौजूद था। उसने जब महिला अधिकारी के मोबाइल फोन पर आरोपी नायब तहसीलदार के बीच हुए व्हाट्स एप चैट को देखा तो भड़क गया।
इसके बाद उसने महिला अधिकारी के मोबाइल फोन से संबंधित अधिकारी को कॉल कर अभद्रता की। बातचीत इतनी आगे बढ़ गई कि आरोपी अफसर भी तैश में आकर महिला अधिकारी के घर में घुस गए। इसी के बाद मारपीट व अन्य घटनाएं हुईं। हालांकि, प्रशासनिक अमला अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। मगर, पुलिस इन बिंदुओं पर गोपनीय ढंग से छानबीन कर रही है।
..
जांच के नाम पर लीपापोती कर रहा प्रशासन : एमएलसी
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने पुलिस व प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है। रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि पीड़ित महिला अधिकारी जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या बताना चाहती थी, लेकिन उन्होंने उनसे मिलने से इन्कार कर दिया। यहां तक कहा कि फर्जी जांच रिपोर्ट बनवाई जा रही है। एमएलसी के अनुसार कानून के अनुसार पीड़िता का न्यायालय में बयान देने के बाद गिरफ्तारी की जानी चाहिए थी, लेकिन जांच और साक्ष्य एकत्र करने के बहाने लीपापोती की जा रही है। प्रशासन के इस रवैये से दूसरी महिला अधिकारियों का मनोबल गिरेगा।