आरोपी निलंबित नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ब्ल को न्यायालय में पेश करने से पहले मेडिकल कराने ले जा
बस्ती। महिला अधिकारी से दुष्कर्म की कोशिश व हत्या के प्रयास के आरोपी निलंबित नायब तहसीलदार घनश्याम की गिरफ्तारी के मामले में पुलिस की कहानी कटघरे में आ गई है। पुलिस के दावे को सोमवार दोपहर में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक बयान ने झूठा करार दिया। यह बयान आरोपी घनश्याम शुक्ला का था।
घनश्याम शुक्ला ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान का शीर्षक ''''स्टेटमेंट फाॅर मीडिया'''' दिया था। इसमें उन्होंने कहा कि बचपन से सुनते आए हैं। सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता। खैर, सत्य को परेशान होते तो देख लिया लेकिन अब इसको पराजित नहीं होने देना है। मेरे चरित्र पर बड़ा लांछन लगा है। मेरे माथे पर कलंक लगाने वालों को वक्त के साथ जवाब मिल जाएगा। साजिश के तार चाहें जितने लंबे हों सच के असमान को नहीं छू सकते।
मुझे भरोसा है सत्य पर, मुझे भरोसा है माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के शासन पर। मुझे भरोसा है प्रशासन पर, पुलिस पर, न्यायपालिका पर और सबसे बड़ा भरोसा है ईश्वर पर। वो कभी भी सत्य को पराजित नहीं होने देंगे। इसीलिए आज मैं कोतवाली बस्ती में अपने आपको कानून को सुपुर्द कर रहा हूं। नीचे अपना नाम घनश्याम शुक्ला लिखा था। यह बयान गिरफ्तारी से पहले आरोपी घनश्याम ने सोशल मीडिया पर जारी किया था। हालांकि अमर उजाला इस बयान की पुष्टि नहीं करता है।