- तीन हजार से ज्यादा सांपों को संरक्षित कर चुका है मकसूद
- तहसील कार्यालय में सांप छोड़ कर सुर्खियों में आए थे पिता हक्कुल
संवाद न्यूज एजेंसी
दुबौलिया। तहसील कार्यालय में सांप छोड़ने के बाद संसद भवन में सांप छोड़ने की धमकी देकर कभी सुर्खियों में रहे सपेरे हक्कुल इस दुनिया में नहीं रहे, अब सांपों को काबू कर उन्हें संरक्षित करने की विरासत उनका बेटा मकसूद आगे बढ़ा रहा है। पिता जैसी ख्याति और तजुर्बा तो नहीं है मगर पिता सीखी तरकीबें उसे बाकी सपेरों से अलग बनाती है।
सिलाई करके गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे इस नौजवान को सांपों से खेलने का चस्का पिता हक्कुल को देखकर लगा। पिता की तरह ही कोबरा और वाइपर सरीखे जहरीले सांपों को पलक झपकते ही मुट्ठी में जकड़ लेना उसकी खूबी है। क्षेत्र ही नहीं पड़ोसी जिले के लोग भी सांप दिखने पर मकसूद को फोन करते हैं। मकसूद का कहना है कि पिता हक्कुल की मौत सांप के काटने से हुई थी, लेकिन उनकी सांपों के संरक्षण की मुहिम को आगे बढ़ाने में वह पूरी शिद्दत से जुटे हैं।
दुबौलिया ब्लॉक क्षेत्र के सैनिया पिपरौल गांव निवासी हक्कुल अपने समय के चर्चित सपेरे थे। सांपों को काबू करके सुरक्षित जगह पर छोड़ देना उनकी दिनचर्या में शामिल था। आठ जनवरी 2019 को एक सांप के डंस लेने से हक्कुल की मौत हो गई थी। अब बेटा मकसूद सांपों के संरक्षण में जुटा है। पत्नी और मां के विरोध के बावजूद कहीं से भी सांप दिखाई देने की सूचना आते ही वह निकल पड़ता है। मकसूद ने बताया कि अब तक वह तीन हजार से अधिक सांपों को पकड़ चुका है। उन्हें संरक्षित करने लिए हर हफ्ते वन विभाग को सौंप देता है।
हक्कुल ने तहसील में खोल दिया था सांपों से भरा बोरा
मकसूद के पिता हक्कुल 2011 में अचानक तब सुर्खियों में आए जब हर्रैया के तहसील कर्मियों से अपनी मांग मनवाने के लिए तहसील कार्यालय में सांपों से भरा बोरा खोल दिया। दरअसल वह सांपों का घर बनाने के लिए पट्टे पर जमीन मांग रहे थे। तहसील प्रशासन ने सांप का घर बनाने के लिए जमीन के पट्टा का प्राविधान न होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। नाराज हक्कुल ने चालीस विषैले सांपों से भरा बोरा तहसील में खोल दिया। जिसके बाद भगदड़ मच गई थी। पुलिस ने इस मामले में केस भी दर्ज किया था।