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Basti News: कीटनाशक पीते वीडियो पोस्ट कर संचालक ने चला इमोशनल दांव

Sat, 03 Jun 2023 01:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। फर्जी नर्सिंग काॅलेज का प्रबंधन खुद को चौतरफा घिरते देख इमोशनल दांव चला है। यह नर्सिंग कालेज दो प्रबंधक चला रहे थे। इनमें से एक ने छात्रों के ग्रुप में एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वह कीटनाशक रसायन पीते दिख रहा है। वीडियो में उसके मुंह से झाग निकल रहा है और बोल रहा है कि ऐसी जिंदगी जीने का क्या फायदा। पुलिस की जांच में पता चला कि यह वीडियो कुछ दिन पुराना बताया जा रहा है लेकिन तभी से उसका पता भी नहीं चल रहा है।
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शुक्रवार को यह वीडियो पुलिस के हाथ लगा है। मामले की जांच कर रहे एसएचओ शशांक शेखर राय ने बताया कि शिकायत कर्ताओं का ध्यान भटकाने और उनकी संवेदना हासिल करने के लिए यह दांव चला है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
उधर, एक शिकायत कर्ता छात्रा लक्ष्मी गुप्ता निवासी जिगिना धाम थाना इटवा सिद्धर्थनगर, वर्तमान पता हरदिया थाना कोतवाली की तहरीर पर पुलिस ने काॅलेज संस्थापक समेत सात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सरदार पटेल सत्यांजलि पैरामेडिकल कालेज हर्दिया के संस्थापक सत्यप्रकाश पटेल व मो. वासिम पर आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी एएनएम कोर्स के लिए कालेज में दाखिला कराया। फर्जी मार्कशीट दे दी। जानकारी होने पर छात्र-छात्राओं ने अपना पैसा मांगा तो आत्महत्या कर लेने की धमकी देने लगे और काॅलेज छोड़कर भाग गए। एफआईआर में उक्त दोनों संस्थापकों के अलावा वासिम की पत्नी गुलशन फातिमा, पुत्र फुरकान, गायत्री पटेल, आशुतोष कनौजिया, मनोज कुमार एवं अन्य लोग शामिल हैं। काॅलेज को पुलिस ने सील कर दिया है।
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यह है मामला, अब तक हुई कार्रवाई
- इंस्टीट्यूट में कई वर्षों से छात्र-छात्राओं को ग्लोबल यूनिवर्सिटी एटा नगर अरुणाचल प्रदेश से संबद्ध होना बताकर एएनएम/जेएमएम सहित मेडिकल से जुड़े विभिन्न कोर्स कराए जा रहे थे। 2020-21 सत्र में प्रवेश लिए छात्र-छात्राओं की प्रथम वर्ष की परीक्षा कराई गई। उनका परिणाम घोषित करके उन्हें मार्कशीट थमा दी गई। मार्कशीट पर रोल नंबर व हस्ताक्षर मुहर नहीं थे। शक होने पर छात्र-छात्राओं ने इसकी तस्दीक करनी शुरू की तो सारा मामला फर्जी पाया गया। शिकायत पर प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि सहारनपुर की यूनिवर्सिटी में प्रवेश दिलाया जा रहा है। कुछ महीने बाद कुछ छात्राओं ने वहां से भी इसकी पुष्टि कराई तो पता चला कि वहां ऐसा कोई एडमिशन नहीं हुआ है। तब से छात्र-छात्राएं रुपये वापस मांग रहे हैं, मगर प्रबंधन के लोग आनाकानी कर रहे हैं। पहली जून को छात्रों को बुलाया गया था मगर प्रबंधन के लोग नहीं आए। दो-ढाई सौ विद्यार्थी डीएम के पास पहुंच गए। डीएम ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, अपर पुलिस अधीक्षक, प्राचार्य मेडिकल कालेज कैली, मुख्य चिकित्साधिकारी की टीम गठित की गई है। एक सप्ताह में जांच आख्या देने का निर्देश दिया गया है।
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अब तक जांच में मिले तथ्य
- अब तक की जांच में पाया गया कि उस कालेज की किसी कालेज से संबद्धता नहीं है। स्थानीय स्तर पर सीएमओ स्तर से 10 बेड के हॉस्पिटल संचालन की एक वर्ष की मान्यता ली गई थी। जिसकी वैधता 30 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। इसके बाद के लिए आवेदन भी नहीं किया गया है। वह लोग छात्रों को फर्जी तरीके से मेघालय, भुवनेश्वर, अरुणाचल प्रदेश आदि की मार्कशीट देते थे।
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