बस्ती। जिले के मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग के मरीजों का इलाज फिर से ठप हो गया है। कॉलेज के हृदय रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. पंकज सिंह ने त्यागपत्र दे दिया है। कॉलेज में यही एकमात्र चिकित्सक थे, जिनके कंध पर हृदयरोग विभाग का संचालन व इको जांच करने की जिम्मेदारी थी। इनके चले जाने से इन दोनों विभागों में काम ठप हो गया है। हालांकि, प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि हृदयरोग विभाग में सामान्य मरीज देखे जा रहे हैं जल्द ही इको जांच भी शुरू करा दी जाएगी।
महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में करीब एक वर्ष पहले हृदयरोग विभाग में डॉ. पंकज सिंह की तैनाती हुई। इनकी तैनाती के बाद से कॉलेज में हृदय रोगियों का इलाज शुरू हो गया। हालांकि संसाधनों की कमी के चलते गंभीर रोगियों का इलाज और जांच नहीं हो रही थी। इधर करीब छह माह पहले कॉलेज प्रशासन ने इको मशीन स्थापित करा दी तो डॉ. पंकज इसे भी संचालित करने लगे थे। यहां सप्ताह में वह दो दिन बैठते थे। इस दौरान इको जांच भी करते थे। इसके चलते संतकबीरनगर व सिद्धार्थनगर के हृदय रोगियों का भी यहां आना शुरू हो गया था। मेडिसिन विभाग की ओपीडी करीब तीन से चार सौ हो गई थी। निशुल्क इको होने से सप्ताह में दो दिन छह से सात मरीजों का इको भी आसानी से हो रहा था। इसी बीच किसी कारण से डॉ. पंकज ने मेडिकल कॉलेज से इस्तीफा दे दिया। इसके चलते हृदयरोग विभाग में मरीजों का फिजीशियन सामान्य इलाज कर रहे हैं। गंभीर रोगियों को यहां से भी रेफर किया जाने लगा है। मेडिसिन विभाग के नोडल डॉ. वीएल कन्नौजिया ने बताया कि यहां हर दिन पांच से छह हृदयरोगी इलाज के लिए आ रहे हैं। चूंकि मरीजों को पता नहीं है कि डॉक्टर यहां नहीं बैठ रहे हैं ऐसे में बुधवार व शुक्रवार को ज्यादा भीड़ हो रही है। सप्ताह के इन्हीं दोनों दिन में चिकित्सक बैठते थे। इको जांच पूरी तरह से ठप है।
हृदयरोग का एक मरीज भर्ती, दो रेफर
मेडिकल कॉलेज में सामान्य हृदयरोग के मरीज कप्तानगंज निवासी राममूर्ति (72) को चिकित्सक ने इमरजेंसी में भर्ती करा दिया है, जबकि गंभीर हृदयरोगी अजय (30) व विपिन (52) को रेफर किया गया है। चिकित्सक डॉ. रजत व बीएल कन्नौजिया के अनुसार राममूर्ति को सीने में दर्द है। इस नाते भर्ती कर लिया गया, जबकि दो अन्य की स्थिति ठीक नहीं थी, ऐसे में उन्हें गोरखपुर रेफर कर दिया गया है।
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अस्पताल पहुंचे दो हृदयरोगी लौटे वापस
रुधौली के 72 वर्षीय राम कुमार का इलाज डॉ. पंकज करते थे, मगर जब वह अपने परिजनों के साथ पहुंचे तो डॉक्टर के न होने की जानकारी हुई। चिकित्सक डॉ. रजत को पर्ची दिखाकर वह वापस लौटे। यही हाल हर्रैया के 56 वर्षीय जग प्रताप का भी है। इनके परिजनों का कहना है कि अब वह गोरखपुर इलाज कराएंगे।
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डॉक्टर पंकज ने त्यागपत्र दिया है लेकिन उसे अभी स्वीकार नहीं किया गया है। फिलहाल उनका काम डॉ. रजत पांडेय को दिया गया है। उन्हें ही इको का प्रशिक्षण करा कर काम लिया जाएगा। वैसे कॉलेज प्रशासन प्रयास कर रहा है कि हृदयरोग विशेषज्ञ मिलें, जिससे कॉलेज का यह विभाग ठीक ढंग से चलाया जा सके।
- डॉ. मनोज कुमार, प्राचार्य, महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज