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Basti News: सहमी पीड़िता के नहीं निकले बोल... शोर मचाती तो पकड़े जाते दरिंदे

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प्रगति पौधशाला,जहां एंबुलेंस वाले ने महिला व उसके बीमार पति को उतारकर भागे थे- फोटो- संवाद
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- सांड़ भगाने के लिए पौधशाला से निकला था कर्मचारी, सड़क किनारे महिला के पति को पड़ा देख की थी मदद
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- लखनऊ से एंबुलेंस में लेकर आ रही थी महिला, छावनी के रेड़वल पौधशाला के सामने छोड़कर भागे थे एंबुलेंस वाले


संवाद न्यूज एजेंसी



छावनी/बस्ती। 29 जून की रात लखनऊ से बीमार पति को लेकर लौट महिला से दरिंदगी की कोशिश के बाद छावनी इलाके में पौधशाला के पास चालक और हेल्पर सभी को उतार कर भाग गए थे। उस दौरान पौधशाला के कर्मचारी जाग रहे थे, पीड़िता शोर मचाती तो दरिंदे पकड़े जाते लेकिन पति की हालत को लेकर परेशान और एंबुलेंस चालक व हेल्पर की हरकतों से सहमे होने के कारण उसके मुंह से बोल नहीं निकल सके।



लवकुश बताते हैं कि उस रात एक सांड़ नर्सरी में बार-बार घुस रहा था, जिसे कई बार भगाने के लिए निकलना पड़ा। उनके साथ सिद्धार्थनगर के नौगढ़ निवासी एक और मजदूर था। जिसे वहां के लोग काका कहकर बुलाते हैं। लवकुश ने बताया कि वह और काका सांड़ भगाकर नर्सरी में लौट रहे थे, तो एक व्यक्ति (महिला का भाई) नल पर पानी लेने पहुंचा। तब तक बाहर सड़क के किनारे लेटे एक व्यक्ति (महिला के पति) पर नजर पड़ी। दोनों दौड़कर करीब पहुंचे तो महिला पति का सिर गोद में रखकर रो रही थी।
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महिला ने दोनों से बताया कि उसके पति को एंबुलेंस वाले धकेलकर भाग गए। लवकुश दौड़कर चारपाई ले आया। तब तक महिला का भाई बोतल में पानी लेकर आ गया। महिला का पति उस वक्त होश में था और बातचीत कर रहा था। महिला ने उसे पानी पिलाया। इस बीच महिला का भाई पुलिस और एंबुलेंस को फोन कर चुका था। कुछ ही देर में 108 एंबुलेंस आ गई और उसमें बैठकर सभी लोग सीएचसी हर्रैया लेकर चले गए। नर्सरी से 108 एंबुलेंस पर रवाना होने के बाद 112 नंबर पुलिस पहुंची होगी। लवकुश के मुताबिक उसके सामने पुलिस नहीं पहुंची थी। हो सकता है आगे जाने के बाद एंबुलेंस रोककर पुलिस ने बातचीत की हो।



छावनी क्षेत्र के रेडवल निवासी लवकुश कहते हैं कि, अगर महिला ने शोर मचाया होता तो उन लोगों को गाड़ी से उतारकर भाग रही एंबुलेंस पकड़ ली गई होती। वहां से करीब दो किलोमीटर पर टोल प्लाजा है, बगल के रेडवल गांव के लोग पहुंच जाते। मगर महिला इतनी परेशान व दुखी थी कि उसके मुंह से बोल ही नहीं निकल रहे थे। वह आधी बात बताते-बताते रोने लगती थी। स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बता पाई कि उसके साथ क्या वाकया हुआ। पौधशाला संचालक काली प्रसाद वर्मा ने बताया कि उन्हें सुबह इन सब बातों की जानकारी हुई। हालांकि वह भी भीतर सोए थे, लेकिन रात के वक्त वाहनों के शोर के कारण इन लोगों की आवाज नहीं सुनाई दी।
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गले की हड्डी बन सकती है जीरो एफआईआर न करना
अब तक की जांच और पीड़िता के बयान को देखते हुए स्पष्ट है कि छावनी पुलिस का जीरो एफआईआर न दर्ज करना गले की हड्डी बन सकता है। महिला का बयान लेने लखनऊ पुलिस उसके घर पहुंची थी, तो उसने बताया कि छावनी थाने से उसे लखनऊ का मामला बताकर वहां एफआईआर दर्ज कराने की बात कही गई। जानकारों का मानना है कि यह रवैया छावनी पुलिस को मुश्किल में डाल सकता है। यदि तहरीर लेकर रख ली होती तो भी जवाब देने से पुलिस बच सकती थी कि वह मामले की जांच कर रही है। संशोधित न्याय संहिता में सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में थानाध्यक्ष को तहरीर मिलने के बाद 15 दिन तक जांच करने का अधिकार दिया गया है। मगर वापस कर देना गुनाह साबित हो सकता है।
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