कप्तानगंज। हरैया ब्लॉक के थाना खास गांव में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत अवध धाम के कथा व्यास पंडित सुरेश शास्त्री ने भागवत कथा के सप्तम दिवस पर श्रीकृष्ण की जीवन यात्रा का सार सुनाया। कहा कि 11 वर्ष की अवस्था में भगवान कृष्ण अक्रूर चाचा के साथ मथुरा पधारे और मामा कंस का उद्धार किया। उग्रसेन जी को पुनः राजा बनाया और यही से भगवान का मुडंन संस्कार यज्ञोपवीत शिक्षा दीक्षा संदीपन ऋषि के आश्रम उज्जैन में संपन्न हुआ। 64 दिन की अवधि में भगवान ने 64 कलाओं को सीखा पुनः मथुरा लौटकर आए। फिर भगवान ने कालयवन का उद्धार करके समुद्र के बीचों-बीच द्वारिका पुरी का निर्माण करा कर 25 वर्ष की अवस्था में भगवान द्वारिका में गए। भगवान कृष्ण के 16108 विवाह संपन्न हुए द्वारिका में और प्रत्येक रानियो से एक-एक पुत्री और 10-10 पुत्र का जन्म हुआ। सुदामा आदि चरित्र की कथा सुनाई अंत में दुर्वासा जी ने श्राप दिया कि यदुवंशियों का संघार हुआ और भगवान 125 वर्ष की लीला संपन्न करके पुन: अपने धाम को पधारे। इस मौके पर आयोजक सुबाष चन्द्र श्रीवास्तव, मृदुल श्रीवास्तव, गिरीश चंद्र, श्रीचंद्र श्रीवास्तव, बृषद श्रीवास्तव सहित कई लोग मौजूद रहे। संवाद