कुदरहा ब्लाक के पीड़िता रत्नावती का क्षतिग्रस्त मकान।
कुदरहा (बस्ती)। लालगंज थाना क्षेत्र के हरखौलिया उर्फ मटियरिया गांव की रत्नावती मनबढ़ों की शिकार बन गई है। उसके पैतृक मकान पर गांव के ही दबंगों ने जबरन कब्जा जमा लिया है। मकान को क्षतिग्रस्त कर उसे बेदखल कर दिया गया है। विरोध करने पर मारपीट और बलवा भी झेल चुकी है। पीड़िता चार साल से अधिकारियों का चौखट पीट रही है। सुनवाई कहीं नहीं है। अब जान माल के भय से वह अपने बच्चों संग मायके में गुजर-बसर कर रही है।
वर्ष 1997-98 में आर्थिक रूप से विपन्न रत्नावती का चयन इंदिरा आवास योजना के लाभार्थी के रूप में हुआ। उसे आस जगी कि अब वह अपने छत के नीचे रहेगी। सबकुछ सही था। सरकार की मदद से उसका आवास बना और बच्चों के साथ वह रहने लगी। लेकिन पट्टीदारों को यह रास नहीं आया। रत्नावती को उजाड़ने का हर षड़यंत्र होने लगा। इससे आजिज रत्नावती के ससुर लालसा ने सवा विस्वा भूखंड 2010 में बहू के नाम बैनामा कर दिया। जिसका खारिज दाखिल भी हुआ। बकौल रत्नावती बैनामा के कुछ दिनों बाद ही उनके ससुर की मौत हो गई। पति फूलचंद नौकरी करने बाहर चले गए। उन्हें अकेला पाकर विरोधियों का हौसला फिर बढ़ गया। उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा। रत्नावती ने बताया कि जान माल के भय से वह बच्चों के साथ अपने मायके पिपरपाती में रहने लगी। बताया कि गांव में चकबंदी शुरू हुई तो उनकी जमीन की नवैयत बदलवाने की कोशिश हुई मगर सफलता नहीं मिली। विपक्षी जब उसका मकान को फिर ध्वस्त करना शुरू किए तो उसने विरोध जताया। इस पर नाराज मनबढ़ों ने उसे मारपीट का घायल कर दिया। तत्कालीन एसपी की पहल पर मुकदमा दर्ज हुआ। रत्नावती के अनुसार विवेचना मेें मुकामी पुलिस ने धारा का ही अल्पीकरण कर दिया। अब रत्नावती पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री से की है। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला आ गया तो उन्हें त्वरित न्याय मिलेगा। वरना मुकामी थाने और चौकी से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है।
बोले सीडी ओ
सीडीओ डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि मामले की शिकायत हुई है तो इसे संज्ञान में लेकर जो न्यायोचित कार्रवाई होगी। किसी के जमीन व मकान पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। यदि ऐसा हुआ है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
कुदरहा ब्लाक के पीड़िता रत्नावती का क्षतिग्रस्त मकान।