टिनिच। बस्ती-डुमरियागंज मार्ग के चौड़ीकरण में जमीन के बदले जमीन देने का मामला फंस गया है। पीडब्ल्यूडी ने सड़क निर्माण में वन विभाग की जमीन को अधिग्रहित कर लिया है। इसके बदले प्रशासन ने वन विभाग को भानपुर तहसील के अजगैवाजंगल में 18.84 हेक्टेयर बंजर भूमि आवंटित की है। सोमवार वन विभाग की टीम संबंधित बंजर भूमि को अपने कब्जे में लेनी पहुंची थी। लेकिन, ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। ग्राम पंचाय की बंजर भूमि को ग्रामीणों ने नहीं नापने दी। डीएफओ की मौजूदगी में बात नहीं बनी तो टीम वापस लौट आई। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित बंजर भूमि का स्वामित्व ग्राम पंचायत के अधीन है। बिना ग्राम पंचायत भूमि प्रबंधन समिति के प्रस्ताव के जमीन वन विभाग को आवंटित नहीं की जा सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नियम विरुद्ध ढंग से ग्राम पंचायत की बंजर भूमि को वन विभाग को दी जा रही है। यहां जंगल विकसित करने से जानवरों का आना जाना अधिक हो जाएगा। इससे ग्रामीणों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पहले वन विभाग के कर्मचारी जमीन की नपाई करने पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उन्हें नापने से रोक दिया और वापस भेज दिया। बाद में डीएफओ डॉ. सरीन सिद्दीकी, रेंजर सोनल वर्मा, बन दारोगा संजय सिंह, फारेस्टर अजय भारती, सर्वेयर शक्ति मिश्र एवं पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता सुनील दत्त भी मौके पर पहुंचे। डीएफओ ने कर्मचारियों को जमीन की नपाई करके पोल गाड़ने के निर्देश दिए। इसके बाद ग्रामीण और आक्रोशित हो गए। काफी संख्या में लोग डीएफओ के सामने पहुंचकर विरोध जताने लगे। गुस्साएं ग्रामीण नारेबाजी करने लगे। बातचीत के दौरान डीएफओ ने कहा डीएम ने वन विभाग को बंजर भूमि आवंटित की है। यदि इस पर आपत्ति है तो उन्हीं के समक्ष ग्रामीण अपना प्रकरण रखें। लेकिन, ग्रामीणों ने बात नहीं मानी। उनका कहना था कि बंजर भूमि ग्राम पंचायत की है। बिना भूमि प्रबंध समिति के प्रस्ताव के यह जमीन दूसरे विभाग को नहीं दी जा सकती है। यदि प्रशासन जबरदस्ती करेगा तो यह मामला न्यायालय में लेकर जाएंगे। पुलिस बल भी मौके पर पहुंची थी लेकिन, ग्रामीणों के विरोध के आगे टीम को वापस लौटना पड़ा।