लंपी से जंग की पशुपालन विभाग ने की कागजी तैयारी
32 पशु अस्पतालों की देखरेख 26 डॉक्टरों के कंधे पर
बस्ती। जिले में पशुपालन विभाग के पास दवाओं की किल्लत है। 32 अस्पतालों में 26 डॉक्टर तैनात हैं। बावजूद इसके अधिकारी सबकुछ ठीक है का दावा करते हैं।
गोवंशीय पशुओं में लंपी रोग से तंत्र हिला है, मगर जिले में पशु पालन विभाग निश्चित है। वह इस बीमारी से जंग की कागजी तैयारी पूरी कर चुका है। पशु चिकित्सक बताते हैं कि लंपी की कोई दवा नहीं है। बचाव ही इलाज है। गोवंशी पशुओं में लंपी बीमारी ने पशु पालकों को सकते में डाल है।
लालगंज के महादेवा निवासी राजाराम कहते हैं कि पशु अस्पताल में संसाधनों की बेहद कमी है। पशु लेकर जाने पर सारी दवा व सुई आदि खरीदनी पड़ती। केवल भवन है, चिकित्सक भी कभी-कभार ही आते हैं। भानपुर के पशु पालक राम निहोर यादव कहते हैं कि पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर पशुपालन विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं है। न इंजेक्शन है ओर न दवाएं। चिकित्सक भी कई अस्पतालों पर नहीं हैं।
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जिले में चार लाख 69 हजार पशु
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब चार लाख 69 हजार पशु हैं। इनमें से करीब सवा लाख गोवंशीय पशु हैं। महीष वंशीय पशुओं की संख्या करीब 60 हजार है।
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कोट
जिले में चिकित्सकों की कमी है। दवाएं आदि जरूरत भर की हैं। पशु पालकों से दवा व इंजेक्शन मंगाने की जानकारी नहीं है। लंपी बीमारी की अब तक कोई दवा नहीं आई है। जिले में सर्वे करने पर कोई भी गोवंशीय पशु इस बीमारी से ग्रसित नहीं पाया गया है।
डॉ. एके त्रिपाठी, मुख्य पशु चिकित्साधीकारी