- जिला अस्पताल में भर्ती परसा जागीर गांव के 18 माह का बच्चा मिला था जेई पॉजिटिव
- पीड़ित परिवार के सभी सदस्यों का भी लिया गया नमूना, आसपास एंटी लार्वा का हुआ छिड़काव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जेई प्रभावित सदर ब्लॉक के परसा जागीर गांव में बृहस्पतिवार को सीएचसी मरवटिया की स्वास्थ्य टीम पहुंची। इस दौरान जेई संक्रमित हुए बच्चे के परिजन समेत आसपास रहने वाले कुल 18 लोगों के खून के नमूने लिए। इसके अलावा निरोधात्मक कार्रवाई की गई। नालियों एवं जलभराव वाले क्षेत्र में एंटी लार्वा का छिड़काव कराने, जेई/एईएस से बचने के उपाय भी सुझाए गए।
स्वास्थ्य निरीक्षक पंकज वर्मा, पर्यवेक्षक अभिनय श्रीवास्तव, अमन श्रीवास्तव की टीम जेई प्रभावित गांव परसा जागीर में पहुंची। यहां का 18 महीने का बच्चा हाईग्रेड फीवर से पीड़ित होकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 17 अगस्त को उसका खून जांच के लिए भेजा गया। तीन दिन बाद 20 अगस्त को उसकी रिपोर्ट जेई पॉजिटिव मिली। हालांकि, तब बच्चा स्वस्थ होकर अस्पताल से घर जा चुका था। इसके दो दिन बाद सीएचसी मरवटिया की टीम जेई प्रभावित गांव पहुंची।
पीड़ित के घर पहुंचकर जेई पॉजिटिव मिले बच्चे का हाल जाना गया। इसके बाद बच्चे के माता-पिता एवं घर के दो अन्य सदस्यों का जांच के लिए खून के नमूने लिए। आसपास के घरों में रहने वाले अन्य 14 लोगों का खून का नमूना लिया गया। इसकी जांच मरवटिया सीएचसी से कराई जाएगी। इसके अलावा टीम ने निरोधात्मक कार्रवाई की। पीड़ित के घर के आसपास एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ। झाड़-झंखाड़ की सफाई भी कराई गई।
टीम में शामिल सदस्यों ने ग्रामीणों को जलजनित एवं अन्य वेक्टर जनित बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया। एहतियात बरतने का भी सुझाव दिया। सीएचसी अधीक्षक डाॅ. विनोद त्रिपाठी ने बताया कि संबंधित गांव में छिड़कांव आदि का कार्य करा दिया गया है। गांव में स्थिति बिल्कुल सामान्य है। फिर एहतियातन 18 लोगों का ब्लड सैंपल लेकर जॉच कराई जा रही है।
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इन लोगों का लिया गया खून का नमूना
एहतियात के तौर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जेई पॉजिटिव मिले बच्चे के पिता राकेश, मां चांदनी, एवं प्रीति (7), अमरनाथ गौड़ के अलावा आसपास रहने वाले प्रिया गौड़, विशाल, सृष्टि, कुशलावती, हिमांशु, सत्यम, आदर्श, ऑचल, सुशीला, शिवानी, नितिन, नीरज, सत्यम का खून का नमूना लेकर जांच के लिए सीएचसी मरवटिया पहुंचाया गया है।
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सुझाए गए बचाव के तरीके
टीम ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए संक्रामक बीमारियों से बचने के तरीके सुझाए। बताया गया कि रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। अपने घर में एव आसपास सफाई विशेष ख्याल रखा जाए। गंदा पानी या वर्षा का पानी जमा न होने दें। पीने योग्य पानी का सेवन उबालकर किया जाए। भीगा कपड़ा कतई न पहने।