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Basti News: हर राह पार लगेगा टैक्स... बन रहा चौथा टोल प्लाजा

Fri, 09 Feb 2024 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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हर्रैया का टोल प्लाजा
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एक ही जिले में तीन जगहों पर पहले से हो रही थी टोल टैक्स की वसूली, चौथे का निर्माण हुआ शुरू
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एक से दूसरा हाईवे पकड़ने में देना होगा कई बार टोल, 40 किमी के दायरे में बन रहा चौथा टोल प्लाजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राष्ट्रीय राजमार्ग की श्रेणी में आने वाले जिले की हर राह पर अब टोल देना होगा। 40 किमी के दायरे में तीन जगहों पर पहले से टोल टैक्स की वसूली की जा रही है। अब दुबौलिया क्षेत्र के रामजानकी मार्ग स्थित बैरागल गांव के पास चौथा टोल प्लाजा बनने जा रहा है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों को हाईवे पर चार पहिया वाहन से चलने पर चौतरफा टोल की मार झेलनी पड़ेगी। वाहनों पर फास्टैग अनिवार्य होने से टोल प्लाजा पर पहुंचते ही जिले में कई बार रुपये खाते से कट जा रहे हैं।
जिले में तीन हाईवे हैं। लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन सड़क पर 40 किमी की दूरी में दो जगहों पर टोल प्लाजा है। छावनी क्षेत्र के चौकड़ी और कोतवाली क्षेत्र के मड़वानगर में यह दोनों टोल प्लाजा स्थित है। इस हाईवे के वाहन चालकों को एक ही जिले में दो बार टोल देना पड़ रहा है। इस हाईवे से महज दस किमी की दूरी पर लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर खड़ऊवा के पास तीसरा टोल प्लाजा है। यहां भी स्थानीय एवं बाहरी वाहनों से टोल वसूली की जा रही है। यहां से 15 किमी की दूरी पर रामजानकी मार्ग पर दुबौलिया क्षेत्र के बैरागल गांव के पास चौथा टोल प्लाजा बनकर तैयार हो रहा है।
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कुछ ही दिनों के बाद किसी भी हाईवे पर चलने के लिए स्थानीय नागरिकों को टोल टैक्स देना पड़ेगा। यदि मुख्यालय से छावनी बाजार होते हुए दुबौलिया, कलवारी होकर वापस लौटना होगा तो तीन जगहों पर टोल देना पड़ेगा। बांसी एवं पुरानी बस्ती क्षेत्र से हाईवे के रास्ते टांडा, कलवारी, छावनी निकलने के लिए भी तीन जगहों पर टोल टैक्स देना पड़ेगा। इसकी सबसे अधिक मार टैक्सी एवं माल वाहकों को झेलनी पड़ रही है। इन्हें अपने ही जिले में 40 किमी के दायरे में तीन से चार बार टोल अदा करना पड़ रहा है।
प्राइवेट वाहन से चलने वाले लोग भी जगह-जगह टोल वसूले जाने से नाराज हैं। कई बार टोल प्लाजा पर इसको लेकर स्थानीय लोगों से विवाद भी हो चुका है। मामला पुलिस तक पहुंचा है। कुछ सामाजिक कार्यकर्ता इस मुद्दे पर आंदोलन भी कर चुके हैं। बावजूद इसके टोल को लेकर स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है।
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मारपीट पर आमादा हो रहे टोल कर्मी
जिन वाहनों पर फास्टैग नहीं लगा मिल रहा है या उसमें रिचार्ज खत्म हो गया है, इसको लेकर टोल कर्मी मारपीट पर आमादा हो जा रहे हैं। वाहन स्वामी या चालक स्थानीय होने की लाख दुहाई देते रहें, लेकिन उनसे वसूली का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कभी- कभी स्थानीय नागरिक होने का प्रूफ देने के लिए आधार कार्ड को भी नहीं मानते हैं। इससे मामला तूल पकड़ लेता है।
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केस- एक
छह माह पहले मड़वानगर टोल प्लाजा पर हिंदू महासंघ के स्थानीय पदाधिकारियों से टोल टैक्स वसूली को लेकर विवाद हो गया था। टोल कर्मी एकत्र होकर पदाधिकारियों से भिड़ गए थे। मामला तूल पकड़ लिया था। कई दिनों तक टोल प्लाजा पर हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों ने धरना दिया। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।
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दो साल पहले मड़वानगर टोल प्लाजा पर भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारियों से भी टोल टैक्स को लेकर बवाल हो चुका है। मामला मारपीट तक पहुंच गया था। इस मामले में भी पुलिस अधिकारियों की मध्यस्थता के बाद स्थिति नियंत्रण में आई थी। गैर जनपद के नंबर की गाड़ी से चलने पर स्थानीय नागरिकों से टोल जमा कराया जाता है। इसी को लेकर ज्यादातर विवाद होता है।
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सहकारी बैंक के चेयरमैन ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
भाजपा नेता एवं जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन राजेंद्र नाथ तिवारी ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से लिखित सूचना प्राप्त की थी। इसमें स्पष्ट लिखा हुआ था कि दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी कम से कम 60 किमी होनी चाहिए। मगर, मड़वानगर और चौकड़ी टोल प्लाजा की दूरी 40 किमी है। नगरीय क्षेत्र में भी टोल प्लाजा नहीं होना बताया गया है। जबकि मड़वानगर टोल प्लाजा शहरी क्षेत्र (बीडीए) के दायरे में है। इस मामले को लेकर राजेंद्र नाथ तिवारी हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में रिट दाखिल की। मगर यह अपील हाईकोर्ट प्रयागराज में किए जाने के निर्देश दिए गए।
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प्रतिदिन हो रही 50 से 60 लाख की टोल वसूली
छावनी क्षेत्र के चौकड़ी टोल प्लाजा से 18 से 20 हजार वाहन प्रतिदिन गुजर रहे हैं। इनसे 28 से 30 लाख रुपये प्रतिदिन वसूली हो रही है। जबकि मड़वागनर टोल प्लाजा से प्रतिदिन 12 से 15 हजार वाहन निकल रहे हैं। इनसे 25 लाख रुपये टोल वसूली की जा रही है। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर खड़ऊवा टोल प्लाजा से 6 से सात हजार वाहन प्रतिदिन गुजर रहे हैं। इनसे 6 से 7 लाख रुपये की टोल वसूली हो रही है।
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टोल वसूली के लिए केंद्रीय सड़क मंत्रालय से व्यवस्था बनाई गई है। सभी वाहनों का टोल दर निर्धारित है। ऑनलाइन टोल जमा होने के कारण फास्टैग से अपने आप रुपये कट जाते हैं। फिर भी स्थानीय नागरिकों को आधार दिखाने पर सहूलियत दी जा रही है।
-शोबित मित्रा, जनरल मैनेजर टोल
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