अखंड सुहाग के लिए सुहागिनों ने रखा तीज का व्रत
निर्जला व्रत रखकर पति के लिए मांगा पार्वती से आशीष
बस्ती। पति की दीर्घायु के लिए भाद्र पद शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि पर मंगलवार को सुहागिनों ने हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह रहा। अखंड सुहाग के लिए मनाए जाने वाले इस पर्व पर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। पति की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए महिलाएं सोलह शृंगार कर माता पार्वती व भगवान शंकर की उपासना करती रहीं। अगली सुबह यानी बुधवार को दान दक्षिणा के बाद व्रती उपवास समाप्त करेंगी।
बाजार में तीज को लेकर खासी भीड़ दिखी। इस पर्व पर शृंगार आदि का सामान छूने के बाद दान दिए जाने की परंपरा है। इसी क्रम में बाजार में दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी रही। शहर के गांधी नगर, कंपनी बाग, कटरा, रौता चौराहा, रोडवेज, पुुरानी बस्ती, दक्षिण दरवाजा सहित अन्य बाजारों में पर्व की धूम नजर आई।
उधर बाजार के ब्यूटी पार्लरों पर भी शृंगार कराने पहुंची महिलाओं की काफी भीड़ रही। इस बार नेट, जार्जेट, टीशू की साड़ियां, आर्टिफिशियल ज्वेलरी और नए रेंज के सौंदर्य प्रसाधनों की जबरदस्त मांग रही। ब्यूटी पार्लर में फेशियल, मसाज, थ्रेडिंग से लेकर हेयर कटिंग के लिए महिलाओं की भीड़ लगी रही। इस बार पारंपरिक और फोक डिजाइन की मेंहदी लगवाने के प्रति महिलाओं की अधिक रुझान रही। टैटू मेहंदी भी खास पसंद बनी हुई है। वहीं साड़ियों से मैचिंग ज्वेलरी और चूड़ियों की तलाश करते महिलाएं देखी गईं।
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पुराणों में महात्म्य
- पंडित देवस्य मिश्र के अनुसार भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की तृतीया को इस व्रत को सुहागन तथा कुंवारी कन्याओं को भी करने का विधान है। पुराणों के माध्यम से सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को वर के रूप में पाने के लिए इस व्रत का पालन किया था। उनके पिता माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। परंतु पार्वती मन में भगवान शिव को पति के रूप में वरण किया। पिता के कठोर निर्णय को देखकर पार्वती की सखियों ने हरण करके जंगल में ले जा कर शिव को पति के रूप में पाने के लिए भादो शुक्ल पक्ष तीज के दिन तप कराया। इसलिए इस व्रत को हरितालिका कहते हैं।