फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: अंतर्द्वंद्व में उलझकर तोड़ रहे जिंदगी की डोर, रोज सामने आ रहे मामले

विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती। किसी न किसी अंतर्द्वंद्व में उलझकर युवक-युवतियां खुद ही अपनी जिंदगी की डोर तोड़ रहे हैं। औसतन रोज एक-दो ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। इनमें फंदे से लटककर जान देने वालों की तादाद सबसे ज्यादा है। आधे से अधिक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें उनकी उलझन की वजह कोई नहीं जान पाया। परिवार वाले जांच नहीं चाहते, इसलिए ज्यादातर मामलों में पुलिस भी दखल देने से बचती है।
विज्ञापन

मनोविज्ञानियों का मानना है कि पारिवारिक कलह, बेरोजगारी, अभाव, प्रेम-प्रसंग, निराशा इसकी वजह हो सकती है। समाजशास्त्री ऐसे हालात को युवा पीढ़ी के लिए घातक बताते हैं।

जनवरी से अब तक सात महीने में आत्महत्या के 42 मामले इस बात के संकेत देते हैं कि हालात के आगे घुटने टेकने की मनोवृत्ति बढ़ गई है। ऐसा करने वालों में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग की तादाद ज्यादा है। इनमें फंदे से लटकना, ट्रेन के आगे आ जाने, नदी-तालाब में कूद कर जान देने के मामले शामिल हैं। अविवाहित किशोरियों और युवतियों की आत्महत्या का आंकड़ा काफी है। पुलिस पोस्टमार्टम तो कराती है, लेकिन कानूनी कार्रवाई के लिए अभिभावक का मुंह ताकते देखा जाता है। अगर किसी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की तहरीर नहीं दी गई तो मामला वहीं खत्म हो जाता है।
विज्ञापन



केस एक-



कलवारी थाना क्षेत्र के बबुरहिया गांव के विजय भान का फंदे से लटका शव मिला था। मंगलवार की रात खा-पीकर कमरे में सोने चला गया था। सुबह काफी देर तक बाहर न निकलने पर परिवार के लोग देखने गए। अंदर कमरे में पंखे से लटका शव देखकर पैरों तले जमीन सरक गई। गांव के लोगों का कहना कि एक सप्ताह पूर्व भी उसने बाग में फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया था। पुलिस के मुताबिक विजय भान का पत्नी से विवाद हो गया था। वह मायके से नहीं आ रही थी।
-
केस दो

दो अगस्त को कलवारी थाना क्षेत्र के पकड़ी छब्बर गांव की 18 वर्षीय युवती का फंदे से लटका शव मिला। उसने पंखे में साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या की थी। चार महीने पहले ही उसने पास के गांव के राजन से प्रेम विवाह किया था। पति-पत्नी के बीच ऐसा क्या हुआ कि उसने फंदा लगाकर जान दे दी, यह किसी को नहीं पता। पुलिस भी फिलहाल इसकी वजह जाने में नाकाम है। लोगों का कहना है कि दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था।

केस तीन
31 जुलाई को पैकोलिया थाना क्षेत्र के कुनगाई गांव खुर्द गांव निवासी जगदेव की पुत्री ने देर शाम कमरे के अंदर जाकर दरवाजा बंद कर लिया। परिवार के लोगों ने दरवाजा तोड़ कर अंदर देखा तो उसका शव फंदे से लटक रहा था। जिंदा होने की उम्मीद में उसे फंदे से परिवार वालों ने नीचे उतार लिया। मृतका की मां संतारा ने रात करीब 12 बजे पुलिस को सूचना दी। उसकी मौत की वजह अब तक नहीं पता चल सकी।


युवाओं में कमजोर आत्मबल की निशानी
कमजोर आत्मबल और अपने पैर पर खड़े होने की घटती क्षमता के कारण इस तरह की घटनाओं में तेजी आई है। कोरोना काल के बाद इसमें 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। इसे रोकने के लिए युवाओं को सकारात्मक कार्य से जुड़े रहना चाहिए। अभिभावकों को भी इसमें सतर्क रहने की आवश्यकता है।
-आरके भारद्वाज, पुलिस महानिरीक्षक

क्या कहते हैं मनोविज्ञानी
व्यक्ति आवेश के ऐसे क्षणों से गुजरता है, जिसमें आत्मघाती मन: स्थिति बन जाती है। व्यक्ति सही और गलत में फर्क नहीं कर पाता। उसे समझ में नहीं आता है कि वह क्या कर रहा है। कई बार उपेक्षा, कुंठा की वजह से असामान्य हो जाता है। कई बार अपनी जिद, इच्छित वस्तु के हासिल न होने की झुंझलाहट और आत्मग्लानि में मौत को गले लगाने की ठान लेता है। ऐसे में परिवार के किसी व्यक्ति में कुछ असामान्य दिखे तो उसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। ज्यादा अच्छा होगा कि वह मनोचिकित्सक से तत्काल संपर्क करे।
विज्ञापन

-डॉ. शिव प्रसाद, मनोविज्ञानी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें