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Basti News: तहसील का काट रहे चक्कर...फिर भी पक्की पैमाइश नहीं

Thu, 21 Sep 2023 11:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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धारा 24 के मामलों के निस्तारण में रुचि नहीं दिख रहे अफसर
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लेखपाल व कानूनगो की फरमाइश पूरी न होने पर सालों से लगा रहे चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आप जमीन की पक्की पैमाइश कराकर उस पर काबिज होना चाहते हैं तो तमाम पापड़ बेलने पड़ेंगे। लेखपाल और कानूनगो के चक्कर लगाने पड़ेंगे। उनकी फरमाइश पूरी करनी पड़ेगी। यदि पूरा कर दिया तो पैमाइश हो जाएगी। वरना तहसील के चक्कर लगाते-लगाते चप्पलें घिस जाएंगी। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि फरियादियों का आरोप है।
जानकारी के अनुसार, तमाम काश्तकार विवाद या अन्य कारणों से अपनी जमीन की पक्की पैमाइश कराना चाहते हैं। ऐसे तमाम मामले आते हैं कि जब काश्तकार भूमि पर कब्जा लेने जाते हैं तो अगल-बगल के लोग जमीन पर कब्जा नहीं करने देते हैं। विवाद की दशा में विपक्षी पक्की पैमाइश कराकर पत्थर नसब कराने के बाद ही कब्जा करने को कहते हैं। ऐसे में काश्तकार को लेखपाल से मिलना पड़ता। वह जमीन की पैमाइश के लिए आपसे कुछ फ़रमाइश करते हैं जिसे पूरी करने के बाद शायद मामला सुलझ जाए, वरना तहसील के चक्कर काटते-काटते सालों गुजर जाएंगे। तहसीलों में सामान्य व पक्की पैमाइश के करीब सात हजार मामले लंबित चल रहे हैं।
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45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
अधिवक्ता राघवेंद्र प्रताप पाठक के अनुसार, पैमाइश का आवेदन देने के बाद 45 दिन में प्रक्रिया पूरी करन होती है। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया तो जल्द प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएंगे। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर लगानेे के लिए मजबूर होते हैं। ऐसे तमाम मामले हैं जिनमें लोग सालों से चक्कर काट रहे हैं।

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धारा-24 के नाम से जानी जाती है पक्की पैमाइश

तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक, भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है उसका नक्शा, खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटा की पैमाइश करने के लिए अगल-बगल के लोगों को नोटिस दिया जाता है। इस दौरान नक्शा और खतौनी के आधार पर नापी नहीं की जाती है। तीन पथरान (फिक्स प्वाइंट जैसे पुराना कुआं, मंदिर, भवन, सड़क आदि) के आधार पर पैमाइश की जाती है। नक्शा और अन्य चीजें दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते हैं। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश (पत्थर नसब) की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। यह प्रक्रिया राजस्व संहिता 2006/16 की धारा 24 के तहत पूरी की जाती है।

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केस-एक

हर्रैया के विजेंद्र कुमार ने बताया कि मई 2022 में पैतृक संपत्ति पर कब्जे के लिए धारा 24 के तहत आवेदन किया। कानूनगो और लेखपाल ने दो महीने बाद पैमाइश कर फील्ड बुक तैयार की। एसडीएम के पत्थर नसब का आदेश भी कर दिया। सालभर से अधिक हो गया तहसील के चक्कर काटते-काटते, लेकिन खेत में पत्थर नसब नहीं हुआ। जबकि कानूनगो की फरमाइश पूरी कर चुका हूं।

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केस दो
हर्रैया के कवलसिया के मोहम्मद रजा ने बताया कि पक्की पैमाइश का आदेश हो चुका है। पत्थर नसब के लिए सात बार एसडीएम को प्रार्थनापत्र दे चुका हूं, लेकिन कानूनगो व लेखपाल आनाकानी कर रहे हैं। लेखपाल व कानूनगो की फरमाइश भी पूरी कर चुका हूं। इसके बावजूद मामले का लटकाया जा रहा है।

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केस ती
खोरिया के मोल्हू चौधरी ने बताया कि करीब दो सालों से पक्की पैमाइश कराने के लिए तहसील के चक्कर लगा रहा हूं। एसडीएम को कई बार प्रार्थनापत्र दे चुका हूं। हर बार काम हो जाएगा का आश्वासन देकर टाल देते हैं। लेखपाल व कानूनगो से भी कई दफा अनुरोध कर चुका हूं, लेकिन कोई सुनने का तैयार नहीं है।
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चर्चा में रहे लेखपालों के घूसखोरी के मामले
- 25 अप्रैल 2023 को सदर तहसील की लेखपाल मुदिता श्रीवास्तव को रंगे हाथ गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता ने गिरफ्तार किया।

- 17 जून 2022 में पैमाइश के लिए घूस लेते समय हर्रैया के राजस्व निरीक्षक घनश्याम वर्मा को गोरखपुर के अपराध निरोधक दस्ता के रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

- 25 अगस्त 2022 को सदर तहसील के एक लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया।

- पांच फरवरी 2023 को सदर तहसील में तैनात लेखपाल का रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद एसडीएम ने उसे निलंबित कर दिया।

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मंडलायुक्त के आदेश को भी कर दिया दरकिनार
धारा 24 के मामलों को निर्धारित समय में निस्तारित करने का निर्देश मंडलायुक्त अखिलेश सिंह कई बार दे चुके हैं। मंगलवार को समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त ने निर्देश दिया है कि पक्की पैमाइश के मामलों में तहसीलों से लापरवाही सामने आ रही है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निर्धारित समय में मामलों का निस्तारण न करने पर अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी।
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