बस्ती। सबकुछ ठीक रहा तो अप्रैल में टिनिच रेलवे स्टेशन के पास भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के साइलो गोदाम का निर्माण पूरा हो जाएगा। यह लखनऊ व हापुड़ के बाद प्रदेश का तीसरा बड़ा गोदाम साबित होगा। इसके बन जाने से अनाज भंडारण की समस्या दूर हो जाएगी। पड़ोसी जिलों को भी लाभ मिल सकेगा।
जिले में एफसीआई के दो गोदामों में कुल 85 हजार मीट्रिक टन भंडारण की क्षमता है। जबकि 1.25 लाख एमटी अनाज का उत्पादन होता है। 40 हजार एमटी अनाज के भंडारण के लिए दूसरे जिलों का सहारा लेना पड़ता है। साइलो गोदाम के निर्माण के बाद भंडारण क्षमता 1.35 लाख एमटी हो जाएगी। इससे अपने जिले के अनाज के अलावा संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर के अनाज भंडारित किए जा सकेंगे।
भारतीय खाद्य निगम के गोदामों की कम भंडारण क्षमता और रखरखाव के अभाव में हर साल देश में लाखों टन अनाज वर्षा एवं चूहों के कारण बर्बाद हो जाता है। एफसीआई गोदामों में अनाज की गुणवत्ता ज्यादा दिनों तक बरकरार रखने के लिए सूबे में लखनऊ व हापुड़ के बाद अब बस्ती को स्टील साइलो गोदाम की सुविधा मिल जाएगी।
इसके लिए भारतीय खाद्य निगम व रेलवे की संयुक्त टीमों ने अपने-अपने जिम्मे के कार्यों को बखूबी पूरी कर चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल में 50 हजार एमटी भंडारण की क्षमता वाला यह हाइटेक गोदाम जिले में तैयार हो जाएगा। इससे जिले में अब तक चली आ रही गेहूं भंडारण की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। यही नहीं पड़ोसी जिलों का अनाज भी यहां भंडारण किया जा सकेगा।
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दूसरे जिलों के गोदामों के सहारे होता है भंडारण
जिले में गेहूं का भंडारण बड़ी समस्या रहती है। हर साल औसतन 125 हजार एमटी गेहूं की खरीद होती है, लेकिन भंडारण के लिए गैर जिलों के अलावा गोरखपुर तक के गोदामों की मदद ली जाती है। इस समस्या को दूर करने के लिए शासन ने प्रदेश में 16 साइलो गोदामों का प्रस्ताव तैयार किया है। लखनऊ व हापुड़ के बाद बस्ती में 640 करोड़़ रुपये से स्टील साइलो गोदाम का निर्माण टिनिच रेलवे स्टेशन से 300 मीटर की दूरी पर किया जा रहा है।
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सभी औपचारिकताएं हो रहीं पूरी
भारतीय खाद्य निगम के प्रबंधक धीरज सिंह ने बताया कि हरियाणा की एनसीएमएल कंपनी का दावा है कि निर्माण कार्य एक माह के अंदर पूर्ण हो जाएगा। वहीं रेलवे के सीनियर सीनियर सेक्शन इंजीनियर हीरामन प्रसाद ने बताया कि गोदाम तक रेलवे लाइन बिछा कर अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
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साइलो गोदाम की ये हैं खूबियां
भारतीय खाद्य निगम के तकनीकी जानकारों के अनुसार, स्टील साइलो गोदाम पूरी तरह कंक्रीट से तैयार हुआ है। उसके अंदर दस-दस हजार एमटी क्षमता वाले बेलनाकार स्टील के पांच टैंक बनाए गए हैं। गोदाम की खासियत है कि इसमें न तो नमी होती है और न ही अनाज में बीमारियां लगती हैं। किसी भी मौसम में इसका तापमान एक जैसा ही रहेगा मौसम के अनुसार भंडारण गृहों का तापमान स्वत: नियंत्रित हो जाएगा।
अनाज को बीमारियों से बचाने के लिए भंडारण गृहों को खोले बिना स्वचालित तकनीक से औषधियां मिलाई जाएंगी। स्टील साइलो टैंक में बिना बोरी के लंबे समय तक अनाज रखा जा सकता है। किसान जब गेहूं लेकर आएंगे तो डोंगे में पड़ने के बाद उसकी सफाई व छंटाई का काम मशीन खुद कर देगी। साफ-सुथरा गेहूं स्वत: गोदाम में पहुंच जाएगा। इसमें न तो बोरे की जरूरत पड़ेगी और न ही लेबर का काम लगेगा। सभी गोदाम रेल लाइन के किनारों पर होने से अनाज की लोडिंग और अनलोडिंग आसानी से की जा सकेगी।