बनकटी। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को अहंकार रहित जीवन जीने की कला सिखाती है। सभी को इसे रुचि के साथ सुनकर समझने व अपने जीवन में उतारने की जरूरत है।
ये प्रवचन चंदीपुर गांव में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन अयोध्या धाम से आए डाॅ. रजनीकांत त्रिपाठी ने सुनाए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब श्रीमद्भागवत कथा सुनने का जब संकल्प करता है तो उस समय परमात्मा उसके हृदय में आकर निवास करते हैं। भगवान की कथा ऐसी है कि इसका ज्यों-ज्यों पान करते हैं, त्यों-त्यों इच्छा बढ़ती जाती है। कथा रस कभी घटता नहीं निरंतर बढ़ता रहता है। श्रीमद्भागवत आध्यात्म का दीपक है। इससे लाखों मनुष्यों के भीतर का अंधकार नष्ट होकर ज्ञान का दीपक जगमगा उठता है।
इस अवसर पर गिरिजा पति शुक्ला, दुर्गा शंकर तिवारी, त्रिभुवन शुक्ला, विमल शुक्ला, गीता शुक्ला आदि उपस्थित रहे।