बस्ती। खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार की चिंता का यहां कोई असर नहीं है। कुश्ती को लेकर तमाम खिलाड़ी यहां केवल अपनी तैयारी कर रहे हैं। न तो अब तक कोई खिलाड़ी किसी मैच में भाग ले सका और न तो यहां कोई भविष्य में इसकी कोई तैयारी है। यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है। यहां कुश्ती के लिए मैदान तो है, मगर वह वर्षों से सूना पड़ा है। क्योंकि न तो यहां कोई प्रशिक्षक है और न कोई खिलाड़ी। यानी प्रशिक्षण के अभाव में कुश्ती उपेक्षित है।
जिला स्टेडियम के हरे भरे मैदान का एक कोना कुश्ती के लिए भी सुरक्षित है। यहां मिट्टी का मैदान तो सुरक्षित है मगर इसकी जम चुकी मिट्टी इसका एहसास दिलाती है कि यहां न तो कोई खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए आता है और न तो कोई प्रशिक्षण देने वाला है जो कुश्ती की पौध तैयार कर सके।
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बोले खिलाड़ी
कुश्ती के पूर्व खिलाड़ी राम कुमार कहते हैं कि जिले का कोई खिलाड़ी कुश्ती की तैयारी करने का मन ही नहीं बनाता। क्योंकि यदि किसी को कुश्ती में भविष्य तलाशना पड़े तो उसे यहां कोई सुविधा नहीं है।
खिलाड़ी राकेश कुमार यादव ने कहा कि उनके भाई कुश्ती के खिलाड़ी हैं, मगर वह बाहर जाने के बाद ही कुछ हासिल कर सके। यहां तो कुश्ती के प्रशिक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां कुश्ती उपेक्षित है।
कुश्ती के लिए प्रशिक्षक के लिए कई पत्र लिखे गए, मगर अब तक कोई प्रशिक्षक यहां तैनात नहीं हुआ। जैसे ही कोई प्रशिक्षक मिला तो खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि प्रशिक्षक की तैनाती हो जाए।
-संजय कुमार, क्षेत्रीय क्रीडाधिकारी