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Basti News: कोई इंजीनियर तो कोई डॉक्टर बन करेगा समाज सेवा

Wed, 26 Apr 2023 02:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। प्रदेश की टॉप टेन की सूची में शामिल जिले के मेधावियों में कोई इंजीनियर बनना चाहता है तो कोई डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहता है। यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने के बाद बातचीत में टॉपरों ने अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा किया। लक्ष्य निर्धारित कर अभी से तैयारी कर रहे हैं।
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प्रैक्सिस विद्यापीठ के छात्र हाईस्कूल परीक्षा में प्रदेश की सूची में दसवां स्थान हासिल करने वाले अथर्व श्रीवास्तव ने कहा कि वह परीक्षा में सफलता के लिए केवल स्कूल से पढ़ाई की। स्कूल की पढ़ाई के बाद 5-6 घंटे पढ़ते थे। कहा कि जब किसी प्रश्न में फंसते थे तो वह स्कूल के शिक्षक से ही सलाह कर लेते थे। कहीं कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ी। कहा कि लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई करने से कोई भी मुकाम आसानी से हासिल किया जा सकता है। कहा कि वह कक्षा आठ से ही आईआईटी की तैयारी का खाका खींच चुके हैं, उसी के आधार पर अब तक तैयारी की है। भविष्य में वह आईआईटी से इंजीनियर बनेंगे।

अब लक्ष्य सिर्फ नीट
प्रैक्सिस विद्या पीठ की इंटरमीडिएट की छात्रा अनुष्का पटेल ने कहा कि उसका लक्ष्य एम्स है। वह नीट की तैयारी कर रही हैं। इंटर की परीक्षा के बाद नीट की परीक्षा में भी टॉप करने का लक्ष्य है। इसी लक्ष्य को लेकर वह तैयारी कर रही हैं। स्कूल में पढ़ाई के बाद वह घर पर 5 घंटे पढ़ाई करती है। मोबाइल फोन से वह अब भी दूर है। कहा कि छात्रों को पहले लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए, फिर उसी दिशा एकाग्रता से कदम बढ़ाया जाए तो मुकाम आसान हो जाता है। इसी दिशा में वह पढ़ाई कर रही हैं।
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लक्ष्य के प्रति समर्पण से हासिल होगा मुकाम
-हर्रैया कस्बे के मुहम्मद हाजी अमीन इंटर कालेज की छात्रा नेहा उपाध्याय ने इंटर की परीक्षा में 95.6 प्रतिशत अंक हासिल प्रदेश की मेरिट लिस्ट में 10वें स्थान पर व जिले की टॉपर बनी हैं। सफलता का श्रेय चिकित्सक पिता अखिलेश उपाध्याय व गृहिणी माता संगीता को दिया। बताया कि उसे जिले की मेरिट सूची में आने का पूरा भरोसा था, मगर प्रदेश की सूची में स्थान मिलने से खुशी दोगुनी हो गई है। वह आईआईटी कर इंजीनियर बनना चाहती है। ।लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई करने से सफलता की राह आसान हो जाती है। गणित के अध्यापक सुजीत के मार्गदर्शन से यह मुकाम हासिल कर सकी। कहा कि वह 6-7 घंटे पढ़ती थीं।
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