दुबौलिया। श्रीरामचरित मानस में महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने भगवान श्री राम और जनकनन्दिनी सीता के विवाह का वर्णन सुंदर ढंग से किया है। दुबौलिया के राम विवाह मैदान में स्वरूपानंद ने कहा कि श्री सीताराम का विवाह लोक कल्याण के लिए हुआ था। प्रकृति के नियंता को ज्ञात था कि जीवन में चौदह वर्ष का वनवास और रावण जैसे अहंकारी असुर का वध धैर्य के वरण के बगैर संभव नहीं है। अतः श्रीराम-जानकी का विवाह मुख्य रूप से यह एक बड़े संघर्ष से पूर्व धैर्यवरण का प्रसंग है। आयोजक बाबूराम सिंह एडवोकेट, सह आयोजक अनिल सिंह, विजय शंकर सिंह, संजीव सिंह, अनूप सिंह, आदि मौजूद रहे।