बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी स्नेह की डोर
- शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया रक्षा बंधन का त्योहार
- मंदिरों में भी भाई-बहनों ने की पूजा, मांगा आशीष
बस्ती। रक्षा बंधन पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर स्नेह की डोर बांधी तो भाइयों ने उनकी रक्षा का भरोसा दिया। सड़कों पर भी लोगों की काफी चहल-पहल दिखी। उपहार की दुकानों पर भाई बहन एक साथ खरीदारी करते देखे गए। रक्षा बंधन पर भाई-बहन दूर-दराज से खिंचे चले आए। मंदिरों में भी पूजा पाठ कर बहनों ने भाई की लंबी आयु की प्रार्थना की।
इस बार का रक्षा बंधन दो दिन मनाया गया। तिथियों-मुहूर्त में जोड़तोड़ की वजह से इस बार बृहस्पतिवार को भी रक्षा बंधन मनाया गया। रात्रि 8 बजकर 53 मिनट से 9 बजकर 49 के बीच के शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। जबकि शुक्रवार 12 अगस्त को सूर्योदय से लेकर प्रात: 07 बजकर 17 मिनट तक राखी बांधी गई। हालांकि शुक्रवार को पूरे दिन यह सिलसिला चलता रहा। राखी, चंदन, मिठाई, कुमकुम, दीपक सजाकर बहनें भाइयों के सामने पहुंच गईं। नहा-धोकर पहले से तैयार भाइयों की कलाई को रंग-बिरंगी राखी से सजा दिया। एक-दूसरे को मिठाई खिलाई गई। भाइयों ने उपहार दिया। बहनों ने उनकी लिए लंबी आयु और समृद्धि की कामना की तो भाइयों ने बहन के लिए भी सुखमय जीवन की प्रार्थना की। रक्षा बंधन से पहले से ही बाजार में उपहार, मिठाई और राखी खरीदने की भीड़ प्रतिष्ठानों पर लगी रही। त्योहार का महत्व इस बात से भी लगाया जा सकता है कि शहरी क्षेत्र में हर दस मीटर की दूरी पर राखी बेचने वालों की दुकानें सजी थीं। यही हाल मिठाई वाली दुकानों की भी रही। हर गली और मोहल्लों में मिठाई और राखी की दुकानों को सजते देखा गया। सबसे अधिक उत्सुकता छोटे-छोटे भाई बहनों में थी। रंग बिरंगी पोशाक और हाथ में राखी बंधवा कर बच्चों ने खूब मौज मस्ती की। बच्चों ने आइसक्रीम, चाकलेट की भी खूब खरीदारी की।
जेल में भाइयों से मांगा अच्छा इंसान बनने का उपहार
जेल की दीवारें भी प्यार के इस त्योहार पर पसीज गईं। शुक्रवार को इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़कियां अपने भाइयों को राखी बांधने जेल पहुंच गईं कि जेल प्रशासन को अपने नियमों में ढील देनी पड़ी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शशिकांत सिंह ने बताया कि राखी बांधने पहुंची किसी भी बहन को मायूस नहीं लौटने दिया गया। राखी बांधने के बाद से बहनें जेल की चहारदीवारी से खिलखिलाती हुई बाहर निकल रही थीं। सुबह से ही जेल में महिलाओं की भारी भीड़ जुट गई थी। जेल के भीतर जाकर बहनों ने अपने भाई की कलाई में राखी बांधकर जल्द न्याय मिलने की दुआएं मांगीं। बहनों ने भाई की कुशलक्षेम पूछी। कुछ ने बुराइयों का त्याग कर अच्छा इंसान बनने का उपहार मांगा।
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रोडवेज की बसों के लिए रही मारामारी
सड़कों पर पूरे दिन भाई बहनों का आवागमन देखा गया। कहीं भाई ने अपनी बहन के घर जाकर राखीं बंधवाया तो कहीं बहन ही खुद भाई के पास पहुंच गई। अपेक्षाकृत कम वाहन चलने की वजह से सवारियों के लिए भी लोग परेशान हुए। रोडवेज पर सवारियां इधर से उधर भागती दिखीं। हालांकि इस दौरान प्राइवेट वाहनों की खूब चांदी रही।
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मुंहबोले मुस्लिम समुदाय के भाइयों को बांधी राखी
बस्ती। भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन पर्व पर जगह-जगह बहनों ने भाइयों की कलाई पर प्यार की डोर रक्षा बांध कर उनके दीर्घायु की कामना की। बहनों को आशीर्वाद देकर भाइयों ने उनकी सुरक्षा का विश्वास दिलाया।
नगर बाजार प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम पंचायत नगर बाजार में बहनों ने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर क्षेत्र की जनता को भाईचारे और एकता का संदेश दिया। नगर बाजार निवासी वंदना पाठक ने गांव में रहने वाले अपने मुंहबोले भाई मोहम्मद आरिफ की कलाई पर राखी बांधकर मुंह मीठा कराया।
आरिफ ने भी बहन को उनकी रक्षा का वचन दिया। वंदना ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से हर रक्षा बंधन के त्योहार पर अपने भाई मोहम्मद आरिफ को राखी बांधती आ रही हैं। दूसरी ओर वाल्टरगंज थाना क्षेत्र की सल्टौआ निवासी पार्वती पिछले 40 वर्ष से नगर बाजार निवासी मोहम्मद वारिस को हर वर्ष रक्षा बंधन के त्योहार पर राखी बांधती हैं। शुक्रवार को मो. वारिस को राखी बांधने पहुंची पार्वती ने कहा कि राखी तो भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है। इसमें संप्रदाय व जाति पाति कोई मायने नहीं रखता।
बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मना। भाई बहन के प्यार का प्रतीक पर्व पर कई स्थान पर लोग बहन से राखी बंधवाने के लिए पैदल, बाइक व साइकिल से जाते देखे गए। बनकटी, देईसाड़, बानपुर, महादेवा, बरहुआ, डेल्हापार, पक्का बाजार, पाकरडाड़, महसों आदि चौराहों पर चहल-पहल रही। लोगों ने मिठाई व राखी के दुकानों पर जमकर खरीदारी की।