दुबौलिया/बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। नदी खतरे के निशान को छूने को आतुर है। विभिन्न बैराजों से पानी छोड़े जाने की वजह से सोमवार की देर रात से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे नदी और तटबंध के बीच बसे आधा दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। यहां के नागरिक दहशत में है। लोग रात जागकर गुजार रहे हैं। वह नदी की भयावह स्थिति पर नजर गड़ाए हुए हैं। बाढ़ आई तो इन गांवों का संपर्क भी टूट जाएगा।
केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार बुधवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से महज 46 सेंटीमीटर नीचे रिकार्ड किया गया है। 92.270 हीटर पर नदी प्रवाहित हो रही है। नदी व तटबंध के बीच बसे सुविकाबाबू गांव को जाने वाले रास्ते के अगल-बगल पानी फैलना शुरू हो गया है। वहीं अशोकपुर ग्राम पंचायत व बरदिया लोहार ग्राम पंचायत के कुछ पुरवे ,विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती, टेढवा में हालत अभी सामान्य है। कयास लगाया जा रहा है कि यदि नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करता है, तो यह सभी गांव पानी से घिर जाएंगे।
अतिसंवेदनशील तटबंध कटरिया- चांदपुर के कटरिया गांव के सामने बने ठोकर नंबर एक पर नदी का दबाव लगातार बना हुआ है। यहां बाढ़खंड लगातार निगरानी कर रहा है। इसी ठोकर के पूरब की तरफ बैकरोल के चलते मध्यम गति से कटान भी शुरू हो गई है, जिससे कृषि योग्य जमीनें धारा में समाहित हो रही है। संवेदनशील स्थानों पर बाढ़खंड सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी बनाए हुए हैं। गौरा-सैफाबाद तटबंध के टकटकवा से लेकर दलपतपुर गांव तक पांच सौ मीटर की दूरी में नदी तटबंध से सटकर बह रही है। इसी तटबंध के मोजपुर गांव के दो ठोकरों का निर्माण अभी भी पूरा नहीं हो सका है।
यहां बोल्डर पिचिंग का कार्य जारी है। गौरा-सैफाबाद तटबंध के अवर अभियंता विजय प्रकाश ने बताया कि जलस्तर बढ़ रहा है। तटबंध पर लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल हालत सामान्य है।
-
बाढ़ आई तो संपर्क से टूट जाएंगे यह गांव
अगर इस बार फिर बाढ़ आई तो दुबौलिया क्षेत्र के दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से टूट जाएगा। नागरिकों के आने- जाने के लिए सिर्फ नाव ही सहारा होगी। नदी व तटबंध के बीच बसे सुविका बाबू, टेढवा, विशुनदासपुर की अनुसूचित बस्ती, मोजपुर, अशोकपुर ग्राम पंचायत, बरदियालोहार ग्राम पंचायत के पुरवे अखनपुर, भुवरिया, श्रीराम राम पुरवा, बानेपुर, पूरेमोतीराम, टकटकवा, पाहीमाफी, नोहरी का पुरवा, सरवरपुर आदि गांवों का आवागमन ठप हो जाएगा। यहां के नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ेगा।
-
पिछले साल बाढ़ की विभीषिका का मंजर कभी नहीं भूलेगा। पिछली बार अचानक गांव में बाढ़ का पानी घुस गया था। ग्राम पंचायत की करीब आठ हजार की आबादी को बाढ़ की त्रासदी से जूझना पड़ा।
-शैलेंद्र चौहान, प्रधान प्रतिनिधि।
अशोकपुर चौराहे पर गारमेंट्स की दुकान से ही घर की गृहस्थी चलती है। पिछले साल आई भयंकर बाढ़ से दुकानदारी काफी प्रभावित हो गई थी। महीने भर बाद दुकान की स्थिति में सुधार हो सका।
-सुरेंद्र बहादुर चौहान, अशोकपुर।
बाढ़ से काफी नुकसान होता है। बाढ़ आने पर इधर उधर भटकना पड़ता है। पिछले वर्ष पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। ऐसे में अब एक फिर नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। बाढ़ की आशंका सताए जा रही है।
-मनीष कुमार, सतहा।
-
पिछले साल बाढ़ आने के दौरान अशोकपुर चौराहे पर स्थित मेरी कामन सर्विस सेंटर की दुकान में पानी घुस गया था। करीब एक सप्ताह तक बाढ़ का कहर झेलना पड़ा था। व्यवसाय ठप हो गया था।
-राम पाल चौहान, अशोकपुर।
पिछले साल की बाढ़ जीवन भर याद रहेगी। सबकुछ अचानक हुआ था। पानी ने तबाही मचा दी थी। गांव के अलावा चौराहे पर स्थित दुकानों में भी पानी घुस गया था। हम लोग शरणार्थी बनकर समय गुजारा था।
-गनीराम, अशोकपुर।