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Basti News: हुजूर...प्रधान ने मेरी भूमि पर चलवा दिया बुलडोजर

Sun, 08 Oct 2023 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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सदर तहसील में डीएम अंद्रा वामसी ने लोगो की सुनी समस्या।
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संपूर्ण समाधान दिवस पर फरियादियों को फिर पिलाई गई आश्वासन की घुट्टी, मायूस होकर लौटे लोग
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जमीन संबंधी विवाद की रही भरमार, फरियादी रामचरित्र ने कहा कि ऐसे ही नहीं होते हैैं देवरिया जैसे कांड


संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। समय सुबह 11:20 बजे। सदर तहसील के प्रथम तल पर स्थित सभागार में संपूर्ण समाधान दिवस पर फरियादियों की सुनवाई शुरू हुई। डीएम, एसपी के अलावा अन्य जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे, इसी बीच 90 साल के सेवानिवृत्त सैनिक राम नयन तहसील भवन में दाखिल हुए। उनके सधे हुए कदम सीढ़ी दर सीढ़ी होते हुए आगे बढ़ रहे हैं। उम्र का तकाजा यह कि प्रथम तल पर पहुंचते-पहुंचते सांस फूलने लगी, लेकिन रुके नहीं, हांफते हुए उस सभागार में पहुंच गए जहां डीएम फरियाद सुन रहे थे। उन्होंने प्रार्थनापत्र आगे बढ़ाया और पीड़ा सुनाई। कहा, प्रधान ने उनके पट्टे की जमीन पर बुलडोजर चलवा दिया है। फसल को तहस-नहस कर दिया।
देश की सलामती के खातिर अपनी जवानी खपाने वाले इस शख्स की बुढ़ापा अपनी ही भूमि को दबंगों से बचाने के लिए प्रशासनिक भवनों की सीढि़यां चढ़ रही हैं। बहरहाल आला अफसरों ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन देकर लौटा दिया। बाहर निकले तो वह बोल पड़े कि बाबू हुआ वही जो हर बार होता है। फिर भी डीएम साहब पर भरोसा है। सुने हैं कि वह काफी सख्त हैं। दूसरा प्रकरण हर्रैया तहसील का है। यहां एसडीएम के सामने कृष्णधर दुबे पहुंचे तो फफक कर रो पड़े। कहा कि पैतृक जमीन का मामला दीवानी न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन विपक्षी पुलिस व राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से जमीन पर निर्माण करा रहे हैं।
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कहा कि कई महीनों से प्रार्थनापत्र दे रहा हूं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। एसडीएम ने फिर उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया। उल्लिखित फरियादी तो सिर्फ बानगी है। ऐसे मामलों की लंबी फेहरिस्त है। जो प्रार्थनापत्र के साथ सभी सरकारी फोरम पर पहुंचते हैं, मगर निराशा ही हाथ लगती है। सदर तहसील में मिले फरियादी रामचरित्र ने कहा कि ऐसे ही नहीं होते हैैं देवरिया जैसे कांड। भूमि विवाद से जुड़े प्रत्येक मामले पहले आला अफसरों के पटल से होकर गुजरते हैं। मगर उनके निपटारे में जिम्मेदारों की रुचि नहीं रहती है। नतीजा विवाद बढ़ता जाता है।
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सदर तहसील में छाए रहे भूमि विवाद से संबंधित मामले

सदर तहसील में जमीन विवाद के ही मामले छाए रहे। अफसरों को प्रार्थनापत्र देकर फरियादियों ने कहा कि साहब! हर बार कार्रवाई का आश्वासन मिलता है, लेकिन इस बार मामला सुलझा दीजिए। ज्यादातर फरियादी राजस्व कर्मियों व पुलिस की मनमानी के चलते जमीन कब्जा किए जाने और एक पक्षीय कार्रवाई करने की शिकायत लेकर पहुंचे थे। सदर तहसील में 12:30 बजे तक डीएम अंद्रा वामसी व एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी ने फरियादियों को सुना। इसके बाद दोनों अफसर एक बजे रुधौली तहसील पहुंचकर सुनवाई शुरू कर दी।
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धारा 24 के तहत पक्की पैमाइश के लिए आवेदन किया था। पत्थर नसब का आदेश हुए तीन साल बीत चुका है, लेकिन राजस्व कर्मियों ने पत्थर नसब नहीं कराया। विपक्षी जमीन का उपयोग नहीं करने दे रहे हैं।

दिव्यांग सरयू प्रसाद, हरदिया, सदर तहसील
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गांव की नवीन परती गाटा संख्या 152 मि. पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। तहसीलदार न्यायालय से बेदखली की कार्रवाई 2013 में हो चुकी है, लेकिन न तो कब्जा हटवाया गया और न जुर्माना वसूला जा रहा है।
बृजभान सिंह, अंदेउरी, रुधौली
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पांच साल से गांव का रास्ता गाटा संख्या 375, 355 व नवीन परती 292 पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। इससे आने-जाने में कठिनाई हो रही है। कई बार शिकायत कर चुका हूं । राजस्वकर्मी जांच कर कब्जा हटवाने के बजाय कब्जेदारों को संरक्षण दे रहे हैं।
ओमकार पाठक, सोनौरा, रुधौली
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गाटा संख्या में 2537 में रिहायशी छप्पर था। उसमें परिवार के साथ रहते थे। जमीन बेश कीमती होने के कारण कुछ भू-माफिया ने राजस्व कर्मियों व पुलिस की मदद से घर उजाड़कर कब्जा कर लिया। अपनी जमीन पर दोबारा कब्जा पाने के लिए सालभर से अफसरों के चक्कर काट रही हूं।
जन्नतुन्निशा, गनेशपुर, सदर तहसील।
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धारा-24 के तहत पक्की पैमाइश के लिए सालभर पहले आवेदन किया था। अब तक काननूगो ने फील्ड बुक तैयार नहीं किया, जिससे जमीन पर पत्थर नसब नहीं हो पा रहा है। इससे पहले दो बार शिकायत कर चुका हूं। पैमाइश न होने पर विपक्षी परेशान कर रहे हैं।
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शोहरत, ओठघनपुर, सदर तहसील

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प्रधान ने गांव के नवीन परती जमीन पर पक्का निर्माण करा लिया है। न्यायालय से बेदखली की कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन कब्जा हटवाने में राजस्वकर्मी रूचि नहीं ले रहे हैं। शिकायत करने पर आश्वासन देकर टाल जाते हैं। प्रधान आए दिन फर्जी मुकदमें में फंसाने की धमकी देते रहते हैं।
विजेंद्र कुमार, इटवा, हर्रैया।
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