बनकटी। गंगौरी गांव में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हवन एवं भंडारे के साथ हुआ। सोमवार को अयोध्या धाम से आए आचार्य दिव्यांशु ने कहा कि आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा। हवन-यज्ञ से वातावरण शुद्ध होने के सासाथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। श्रीमद्भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने से व्यक्ति के आचरण में भी बदलाव हो जाता है। रामयज्ञ मणि त्रिपाठी, रमेश शुक्ला, हर्ष नारायण शुक्ल, राम प्रसाद पांडेय, रुद्र नारायण त्रिपाठी, अनिरुद्ध नारायण त्रिपाठी, राजीव शुक्ला आदि उपस्थित रहे।