कटरा, मूड़घाट, बड़ेवन, पुराना डाकखाना क्षेत्र में बेशकीमती नजूल की जमीनाें पर लोगों का कब्जा
रिहायशी घरों के अलावा कामर्शियल उपयोग में भी आ रहीं यह जमीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के कटरा, मूड़घाट, बड़ेवन, पुराना डाकखाना क्षेत्र में बेशकीमती नजूल की जमीन पर लोगों का कब्जा है। कहीं रिहायशी घर बन गए हैं तो कहीं दुकान और शॉपिंग मॉल संचालित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई से प्रशासन दूर भाग रहा है।
शहर के कुछ हिस्से नजूल क्षेत्र में रच-बस हैं। रसूखदारों ने इन जमीनों को हथियाने में कोई को- कसर नहीं छोड़ी है। मुख्य सड़कों के किनारे यह जमीनें कामर्शियल उपयोग की होकर रह गई हैं। मोहल्लों एवं गलियों से जुड़ी नजूल की जमीन आवासीय उपयोग में लाई जा रही है। कटरा, पतेलवा, मूड़घाट, बड़ेवन, बड़ार, हवेलिया आदि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नजूल की जमीन लोगों के कब्जे में है।
बड़ार में कुछ नजूल की जमीनों को हथियाने के लिए रसूखदारों ने पहले अभिलेख में हेरफेर कर नाम दर्ज कराया। इसके बाद प्लाटिंग करके बेचना शुरू कर दिया। अब इन जमीनों पर बैनामा के जरिए कई कब्जेदार हो गए हैं। बाकायदा कॉलोनी बस गई है। मूड़घाट और डमरूआ में भी यही खेल चल रहा है। कुआनो के तटीय क्षेत्र में नजूल की चार से पांच एकड़ जमीन पर नाम दर्ज कराकर लोगों ने कब्जा कर लिया है। यहां नजूल एवं नान जेडए की जमीन पर कब्जा को लेकर कई लोगों में विवाद भी चल रहे हैं। दो दर्जन से अधिक मकान और चहारदीवारी नजूल की जमीन पर खड़े कर दिए गए हैं। इन प्रकरणों से राजस्व विभाग भी अवगत है।
कटरा, न्याय मार्ग और कंपनीबाग के आसपास मुख्य मार्ग के दोनों तरफ आधा दर्जन से अधिक गाटे नजूल के हैं। मगर, यहां लोगों का कब्जा हो गया है। खतौनी में नाम दर्ज है। इन जमीनों की खरीद-फरोख्त भी कई बार हो चुकी है।
पुराना डाकखाना मोहल्ले में नजूल की जमीन पर लोगों का कब्जा है। राजस्व अभिलेख के मुताबिक यहां अधिकतर जमीन नजूल की है। मगर, पुराने समय से यहां लोगों ने कब्जा कर लिया है। चार एकड़ से अधिक जमीन पर लोगों के नाम दर्ज हो चुके हैं। जिसकी खरीद-फरोख्त भी कई बार हो चुकी है। वर्तमान कब्जेदार संक्रमणीय भूमि की तरह बैनामा के आधार पर कब्जा बनाए हुए हैं। कब्जेदारों का कहना है कि इन जमीनों को शुरू से ही संरक्षित किया जाना था। अब जहां कॉलोनी बस गई है और लोग 50- 60 साल से रह रहे हैं उन्हें कैसे खाली कराया जा सकता है। यदि नजूल की जमीन है तो इनकी रजिस्ट्री पर रोक लगनी चाहिए।
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गांवों में गुम है नजूल की जमीन
शहरी क्षेत्र के आसपास के गांवों में नजूल की जमीनें गुम हो गई हैं। राजस्व अभिलेख में नाम परिवर्तित हो गया है और मौके पर लोगों का कब्जा है। शहरी क्षेत्र के लगातार विस्तार होने से इन जमीनों की कीमत बढ़ गई है। रसूखदार लोग जिम्मेदारों की मिलीभगत से इन जमीनों को हथिया रहे हैं। पहले राजस्व अभिलेख में खेल करके नाम दर्ज कराया जा रहा है। इसके बाद जमीन पर कब्जा करके बेच दिया जा रहा है। जामडीह, चननी, संतपुर, गदहाखोर, खीरीघाट, मिश्रौलिया, डमरूआ, डड़वा, ढोरिका, बरगदवा आदि समीपवर्ती गांवों में नजूल की जमीनों पर कब्जा करने का खेल अभी भी चल रहा है।
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नजूल की जमीन चिह्नित करने में रुचि नहीं
शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में बेशकीमती नजूल की जमीनों के चिह्नांकन कार्य में प्रशासन की रुचि नहीं देखी जा रही है। अब तक तहसील प्रशासन ने सिर्फ मानचित्र के आधार पर नजूल की जमीन का कार्यालयी विवरण ही जुटा सका है। मौके पर किसी तरह की कार्रवाई करने की सुगबुगाहट नहीं है। यहां तक कि खाली पड़ी नजूल की जमीन को भी संरक्षित करने की कवायद नहीं शुरू हुई है।
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कोट
योजनाबद्ध ढंग से नजूल की जमीन को राज्य सरकार के अधीन करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए टीम गठित कर क्षेत्रवार जमीन की पड़ताल कराई जाएगी। जिस पर प्रशासन की ओर से कब्जा दखल की कार्रवाई भी की जाएगी।
-शत्रुहन पाठक, एसडीएम सदर