बस्ती। चार जुलाई से शुरू हो रहे शिवमास सावन को लेकर पुलिस और प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। यह महीना पुलिस व प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। इसके लिए सरकारी अमलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। साफ-सफाई के अलावा रास्ते के गड्ढों को भरने का काम तेजी से चल रहा है।
भद्रेश्वरनाथ के अलावा तिलकपुर, देवरिया, महादेवा के अलावा कड़र मंदिर पर सुरक्षा के व्यापक इंतजामात किए जा रहे हैं। वहीं, पूरे सावन भर बड़ी संख्या में प्रतिदिन शिवभक्तों के जलाभिषेक करने का अनुमान है। इसे देखते हुए कांवड़ियों के रूट, फोरलेन डायवर्जन, सफाई, विश्राम स्थल, घाट आदि की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कांवड़ यात्रियों और जिले व आसपास के करीब साढ़े पांच लाख श्रद्धालुओं के शिवरात्रि पर भद्रेश्वरनाथ पहुंचने की उम्मीद है। इसे लेकर पुलिस फोर्स की व्यवस्था की जा रही है। दूसरे जनपद से भी फोर्स की मांग की गई है।
आईजी आरके भारद्वाज ने बताया कि पूरे सावन भर सभी शिव मंदिरों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। संबंधित थानों के अलावा जरूरत के मुताबिक रिजर्व पुलिस लाइंस और दूसरे जनपद की फोर्स लगाई जा रही है। जहां तक सावन के आम दिनों में सुरक्षा का सवाल है तो उसे संबंधित थानों के जिम्मे सौंपा गया है। उधर, कांवड़ यात्रियों के लिए उचित माहौल तैयार करने के लिए थानावार बैठकें की जा रही हैं। इनमें कांवड़ संघ के पदाधिकारियों के साथ रायशुमारी की जा रही है। उन्हें खास तौर से डीजे बजाने को लेकर निर्धारित तीव्रता के बारे में आगाह किया जा रहा है। ताकि डीजे के शोर से किसी को परेशानी न हो।
सीसीटीवी कैमरे की निगहबानी में होगी यात्रा
- वर्ष 2016 की कांवड़ यात्रा के दौरान कप्तानगंज में मामूली चूक के कारण बड़ी घटना हो गई थी। इसमें गोरखपुर के जिला जज की कार को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। जज को भी हल्की चोटें आई थीं। इस घटना में पुलिस, प्रशासन की काफी किरकिरी हुई थी। बाद में उसी घटना में घायल हुए हनुमान चौधरी की मृत्यु हो गई थी। इसे देखते हुए इस बार प्रशासन कोई जोखिम नहीं ले रहा। इसका नतीजा है कि अयोध्या से भदेश्वरनाथ तक प्रत्येक किलोमीटर पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि कांवड़ यात्री ही नहीं, रूट पर निकले प्रत्येक व्यक्ति को कहीं न कहीं स्कैन किया जाएगा। अयोध्या से भद्रेश्वरनाथ के बीच लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के अलावा मंदिर, शहर के प्रमुख चौराहों, अमहट स्थित विश्रामालय, जेल गेट आदि प्रमुख स्थानों पर अतिरिक्त कैमरे लगाए जाएंगे।
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मंदिर के पास मेले का खाका तैयार
- डीएम प्रियंका निरंजन के अनुसार मंदिरों के पास लगने वाले मेले व सुरक्षा व्यवस्था का खाका भी खींच लिया गया है। शिवभक्तों की सुविधा के लिए कई जगह बैरिकेडिंग कराई जा रही है। वाहनों के लिए अलग-अलग स्टैंड बनाए जाएंगे। मंदिरों पर सफाई कार्य के लिए सफाईकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। व्यवस्था में सहयोग के लिए स्काउट गाइड के अलावा अन्य स्वयंसेवकों को लगाया गया है।
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बस्ती मंडल की पहचान है बाबा भद्रेश्वरनाथ मंदिर
बस्ती। अपने आप में कई पौराणिक कथाओं को समेटे बाबा भद्रेश्वरनाथ मंदिर पूरे मंडल की पहचान है। श्रावण मास में राम की नगरी अयोध्या से सरयू नदी का जल लेकर लाखों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करते हैं। इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि में भी यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। प्रत्येक सोमवार को भी श्रद्धालु इस मंदिर में सैकड़ों की संख्या में पूजा करने आते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां पर जलाभिषेक और पूजन अर्चन से मनोकामना पूर्ण होती है।
कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना रावण ने की थी। यहां पर अज्ञातवास के समय युधिष्ठिर ने पूजा की थी। अंग्रेजों के शासन में ब्रिटिश सेना मंदिर व उसके आसपास के क्षेत्रफल पर कब्जा करना चाहती थी, लेकिन दैवीय प्रकोप के चलते अंग्रेजों को पीछे हटना पड़ा। इन सब चर्चाओं को बस्ती जिले में रहने वाले अधिकांश शिवभक्तों से सुना जा सकता है।
बस्ती मंडल मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर कुआनो नदी के तट पर बाबा भद्रेश्वरनाथ का प्राचीन मंदिर स्थित है। इसकी भव्यता देखते ही बनती है। वैसे तो यहां पूरे साल शिवभक्तों के जल चढ़ाने का क्रम चलता रहता है, लेकिन सोमवार और सावन के महीने में तो यहां लाखों की संख्या में दूर-दूर से शिवभक्त आते हैं। कहते हैं कि यहां सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। इस मंदिर से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। कहा जाता है कि मंदिर में एक ऐसा शिवलिंग है, जिसे कोई भी भक्त अपनी बांहों में समेट नहीं पाता है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि लोक मान्यताओं के अनुसार रावण हर रोज कैलाश जाकर भगवान शिव की पूजा करता था। वहां से एक शिवलिंग लेकर वापस लौटता था। उसी दौरान ये शिवलिंग भी रावण कैलाश से लेकर आया था।
वहीं, मान्यता है कि महाभारत काल में द्युतक्रीड़ा में हारने के बाद अज्ञातवास के दौरान राजा युधिष्ठिर ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। यह क्षेत्र वर्षों तक घने जंगलों से घिरा रहा। कहा जाता है कि ब्रिटिश कालीन सरकार मंदिर के आसपास के क्षेत्रफल पर कब्जा करना चाहती थी। मगर ब्रिटिश सेना को दैवीय आपदाओं के कारण इससे कदम पीछे खींचना पड़ा था। जनश्रुति के अनुसार, मंदिर के शिवलिंग को चोरी करने का भी प्रयास किया गया था। कुछ चोरों ने शिवलिंग की खुदाई भी की, लेकिन काफी खुदाई के बाद भी जब शिवलिंग का अंत नहीं मिला। इस दौरान मधुमिक्खयों ने हमला कर दिया। जिसके बाद वह भागने लगे तो उनके गाड़ी का पहिया वहीं धंस गया और पत्थर बन गया। इसे आज भी देखा जा सकता है।