- फिर भड़की सियासी आगः 80 के दशक में हुई शक्ति के बाबा की हत्या में पूर्व विधायक पर लगे थे आरोप
- शक्ति के पिता ने खत्म कर दी थी पुरानी रंजिश, बढ़ गया था मेलजोल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शक्ति सिंह हत्याकांड से जिले में सनसनी फैल गई है। वारदात में पूर्व विधायक राना कृष्ण किंकर सिंह के बेटे भाजपा नेता नागेश सिंह का नाम आने के बाद इसके सियासी आग एक बार फिर भड़कती नजर आ रही है। शक्ति के भाई विक्रम ने कहा है कि उनके बाबा कृष्ण प्रताप सिंह की हत्या पूर्व विधायक के परिवार ने कराई थी। उसी रंजिश में अब शक्ति का भी अपहरण कर कत्ल किया है।
80 के दशक में कृष्ण प्रताप सिंह उर्फ पहलवान सिंह की हत्या हुई थी। इसमें उनके पटीदार पूर्व विधायक और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राना कृष्ण किंकर सिंह पर आरोप लगे थे। उस समय शक्ति के पिता रमेश सिंह की उम्र करीब 13 साल थी। दोनों परिवारों के बीच लंबे समय तक शह मात का खेल चलता रहा। बाद में रमेश सिंह के बजरंग दल में सक्रिय होने के बाद केस में सुलह हो गई थी। शक्ति सिंह और नागेश प्रताप के परिवार की कटुता भी काफी हद तक दूर हो चुकी थी।
क्षेत्र के लोग बताते हैं कि बाद में शक्ति के पिता रमेश सिंह राना परिवार से काफी घुलमिल गए थे। शक्ति भी नागेश के साथ अक्सर देखे जाते थे। घटना के अन्य पहलुओं पर भी दबी जुबान लोग बात कर रहे हैं, हालांकि कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। पोस्टमार्टम हाउस पर शक्ति के भाई विक्रम ने बताया कि रसूख के बल पर यह वारदात की गई है। आरोप लगाया कि सबके सामने से शक्ति को अगवा कर नागेश अपने घर ले गए और पीट-पीटकर हत्या कर दी। बताया कि शक्ति दो साल से बहन के घर रहता था। कभी कभार ही गांव आता था। पटीदार के निधन की जानकारी पर वह गांव में पहुंचा था। कहा कि, जरा भी आशंका होती तो मूड़घाट पर उसे छोड़कर नहीं आते।
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कान से सिर के बीच 17 वार किए गए
शक्ति को मौत के घाट उतारने के लिए हत्यारोपियों ने 17 वार किए। किसी भारी चीज से सिर के बीच प्रहार किया गया है। कान के पास धारदार हथियार से वार किया गया है। पोस्टमार्टम में सिर के दाहिनी तरफ छह चोट पाई गई। एक चोट छह वर्ग सेंटीमीटर और बाकी दो-तीन सेंटीमीटर की है। सिर के बीच भारी चोट के निशान हैं। इन चोटों के कारण ब्रेन की हड्डी टूट गई और यही मौत का कारण बनी। रिपोर्ट के मुताबिक हत्या के समय शक्ति का पेट एकदम खाली था।
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24 की रात ही हो गई थी हत्या
शव की स्थिति देखकर अनुमान लगाया गया है कि 24 सितंबर की रात ही हत्या कर दी गई थी। तटबंध पर मिले खून के निशान से लगा कि हत्या करके कुछ ही देर बाद दो बोरे में शव भरकर सरयू में फेंकने के लिए लगाया गया था। पोस्टमार्टम में ब्रेन गला हुआ पाया गया, जो अमूमन मौत के तीन दिन बाद होता है।
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अन्य पहलुओं पर भी पुलिस कर रही जांच
इस हत्याकांड में नामजद आरोपियों की तलाश में पुलिस की तीन टीमें भले ही लगी हुई हैं लेकिन अंदरखाने दूसरे पहलुओं पर भी छानबीन चल रही है। शक्ति सिंह के बैकग्राउंड से लेकर उसकी पूरी गतिविधियों को खंगाला जा रहा है। पता चला है कि उसके खिलाफ दुष्कर्म आदि के केस पहले से दर्ज थे। उन घटनाओं को भी पुलिस खंगाल रही है।
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दूसरी तहरीर पर दर्ज हुआ केस
24 सितंबर से लापता शक्ति सिंह की गुमशुदगी की सूचना नगर थाने में 26 सितंबर को शाम 4:48 बजे दर्ज की गई थी। इसके सात घंटे बाद 11 बजकर 45 मिनट पर हत्या की तहरीर दी गई। हालांकि दोनाें तहरीर में भाषा और तथ्य लगभग एक जैसे हैं। पुलिस गहनता से छानबीन कर रही है।
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यह है घटनाक्रम
दुबौलिया थाना क्षेत्र के गौरा-सैफाबाद तटबंध पर गौरा तिवारीपुर गांव के सामने बने ठोकर के पास बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने खून के धब्बे देखे। आशंका पर 10 मीटर दूर नदी के तट पर झांकने लगे तो पानी में दो बोरे में भरा हुआ कुछ दिखाई पड़ा। मौके पर पहुंची पुलिस ने बोरे खुलवाए तो शव मिला। सिर से कमर तक का हिस्सा प्लास्टिक के बोरे में था, जबकि नीचे का हिस्सा जूट के बोरे में बंधा था। शरीर पर सिर्फ काले रंग का अंडरवियर था। दाहिने हाथ में शर्ट का टुकड़ा फंसा हुआ था। तटबंध के ठोकर पर लगे बोल्डर पर खून के काफी निशान मिले। देर शाम पता चला कि वह शव नगर थानाक्षेत्र के बेलाड़ी रानीपुर निवासी शक्ति सिंह का है।
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गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने झोंकी ताकत
पुलिस ने इस हत्याकांड में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। जिले के अलावा गैर जनपद के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। आरोपियों के सगे संबंधियों पर भी नजर रखी जा रही है। राजनीतिक परिवार से होने की वजह से माना जा रहा है कि आरोपी ज्यादा समय तक चकमा नहीं दे पाएंगे।
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दुबौलिया क्षेत्र में रास्ते को लेकर चर्चा
दुबौलिया थानाक्षेत्र के सरयू नदी के तटबंध पर जिस जगह शव मिला है, वह काफी सुनसान है। हालांकि सैफाबाद तटबंध पर सड़क ठीक होने से किसी भी वाहन का वहां पहुंचना मुश्किल नहीं है। मगर क्षेत्र में चर्चा है कि हत्यारोपी किसी शॉर्टकट रास्ते से आए होंगे। आशंका जताई जा रही है कि शव कलवारी-बस्ती मार्ग के बजाय किसी और मार्ग से ले जाया गया होगा ताकि रास्ते में अकसड़ा का टोल न पड़े।