कंपनी बाग मंदिर पर भजन गाती महिलाएं।
नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की हुई आराधना
- घर से मंदिर तक बही आस्था की बयार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर मां भगवती का आगमन होते ही देवी भक्त भाव विभोर हो गए। चारों ओर आदि देवी की भक्ति की बयार बह रही है। वासंतिक नवरात्र के पहले दिन ‘शैलपुत्री’ की आराधना के साथ नवरात्र व्रत की शुरुआत हुई। जगह-जगह श्रीदुर्गा सप्तशती पाठ का अनुष्ठान शुरू हो गए। लोग दिन भर घरों में कलश स्थापना कराते रहे। लोग आदि शक्ति की आराधना में जुट गए हैं।
नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में भोर से ही भक्तों का तांता लग गया था। पूजा की थाल लेकर छोटे बच्चों से लेकर बडे़ बूढे़ तक मां की पूजा में तल्लीन हो गए। व्रत रखने के साथ गृहणियां कलश पूजन और फलाहार के इंतजाम में व्यस्त रहीं। अधिकतर लोगों ने घरों में मां की पूजा कर नवरात्र व्रत आरंभ किया। बड़ी संख्या में देवी भक्त देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंचे। कई लोग प्रतिपदा और अष्टमी का व्रत रखेंगे। वे द्वितीया से सप्तमी तक केवल पूजा पाठ करेंगे। सभी नवमी में हवन करेंगे।
पंडित देवस्य मिश्र के मुताबिक, हिमालय के घर पैदा होने की वजह इस देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा। इनकी आराधना करते समय दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का स्मरण करना चाहिए। इस दिन योगियों का मन मूलाधार चक्र में होता है। दुर्बल चंद्रमा वाले जातकों को शैलपुत्री की पूजा विशेष फलदायी होती है। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित माता के मंदिरों पर सुबह से ही पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी। चहुंओर देवी के जयकारे और घंटे गूंजने लगे। घरों में कलश की स्थापना का कार्यक्रम पूरे दिन चलता रहा। जबकि माता का दर्शन और पाठ का क्रम शुरू हो गया। यह क्रम लगातार 10 दिनों तक चलेगा।