23 प्रतिष्ठानों पर छापे, अब तक 10.35 लाख वसूले
- स्टेट जीएसटी की टीम ने पांचवें दिन भी मारा छापा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। स्टेट जीएसटी की टीम ने पांच दिन के भीतर जिले में 23 प्रतिष्ठानों पर छापा मारा। इस दौरान कुल 10 लाख 35 हजार रुपये बतौर जुर्माना वसूल किया है।
स्टेट जीएसटी की टीम लगातार व्यापारियों से अपील कर रही है कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, यह कार्रवाई उन्हीं के खिलाफ की जा रही है, जिनके खिलाफ या तो शिकायत हो चुकी हैं या फिर वह कर चोरी कर रहे हैं अथवा काला बाजारी में लिप्त हैं। बावजूद इसके व्यापारी लगातार दुकानें बंद कर विरोध जता रहे हैं।
पिछले पांच दिनों से जिले में शासन स्तर से आई टीमों ने जगह-जगह छापेमारी कर व्यापारियों में हड़कंप मचा दिया है। पांच दिसंबर से शुरू हुई छापेमारी में पहले दिन छह, दूसरे दिन सात, तीसरे दिन सात, चौथे दिन दो व शुक्रवार को पांचवें दिन सिम इंटरप्राइजेज साहू मार्केट में छापा मारा।
इस पूरी कार्रवाई को एसजीएसटी की टीमों ने गोपनीय रखा है, इससे व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जिले के प्रमुख बाजारों में व्यापारी दुकानें बंद करके इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह इंटेलिजेंस बेस्ड रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तरीय अधिकारियों की निगरानी में किया जा रहा है। इससे आम व्यापारियों को घबराने व परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।
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व्यापारियों के दबाव में धीमी पड़ी छापेमारी
छापेमारी का ग्राफ दिन-प्रतिदिन गिरने का प्रमुख कारण व्यापारियों का दबाव माना जा रहा है। शुक्रवार को महज एक दुकान पर हुई छापेमारी से यह महसूस किया जा रहा है कि एसजीएसटी की टीम का रुख अब नरम पड़ रहा है। वहीं, शहरी बाजारों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर पलायन कर रहे हैं। जिसे विरोध माना जा रहा है। व्यापारियों का यह भी कहना है कि अगर अब भी छापेमारी नहीं रुकी तो सड़क पर उतर कर विरोध जताया जाएगा।
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दुकानें बंद होने से प्रभावित हो रही कार्रवाई
जिले के स्टेट जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर विकास द्विवेदी ने बताया कि बाजार बंद होने के कारण छापेमारी प्रभावित हो रही है। जबकि न तो यह कोई किसी तरह का सर्वे है और न ही ईमानदार व्यापारियों को घबराने की कोई जरूरत है। हर दिन विभाग मुख्यालय से उन व्यापारियों की सूची आती है, जिनके खिलाफ या तो शिकायत मिली है, या फिर जो कर चोरी, कालाबाजारी व अन्य नियम विरुद्ध व्यापार में लिप्त हैं। इससे आम व्यापारी का कोई नुकसान नहीं है। यह सिर्फ चिह्नित व्यापारियों की महज विभागीय जांच पड़ताल है जो शासन स्तर से रोजाना सूची मिलने पर की जा रही है। बताया कि इन्वायस न देने वाले, कच्चे पेपर पर बिल बाउचर देने वाले, कम टैक्स जमा करने वाले और कर चोरी करने वालों के खिलाफ ही जांच-पड़ताल की जा रही है।