संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ज्यादातर स्कूलों में सिलेबस अभी अधूरा है। जबकि छमाही परीक्षा शुरू हो चुकी है। अब आगे प्रयोगात्मक परीक्षा, त्योहारों की छुट्टियां, ठंड आदि के चलते पढ़ाई के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है। बोर्ड परीक्षा में शामिल होने जा रहे छात्र और अभिभावक परेशान हैं। लगातार पड़ रही छुट्टियां भी इस परेशानी को बढ़ाने में लगी हैं।
अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के चलते माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित है। आने वाले दिन मूल्यांकन की भेंट चढ़ेंगे। जनवरी में बोर्ड प्रैक्टिकल होने के चलते आने वाले दिनों में कक्षाओं का संचालन अधिक नहीं हो सकेगा। शिक्षा सत्र का बदलाव शैक्षिक व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रहा है।
छात्र-छात्राएं कोर्स को लेकर चिंतित हैं। वहीं संस्थाओं में कक्षा संचालन को लेकर समय नहीं बचा है। ऐसे में शैक्षिक कैलेंडर भी दम तोड़ रहा है। प्रधानाचार्यों की मानें तो एक अप्रैल से नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के चलते वार्षिक गृह परीक्षाएं भी बोर्ड परीक्षाओं से पहले कराने की मजबूरी है। बताते चलें कि आधे दिसंबर तक चलने वाली छमाही परीक्षाओं के बाद कक्षा संचालन को समय नहीं मिलेगा।
31 मार्च को समाप्त हो रहे वर्तमान शिक्षा सत्र के चलते व्यवस्थाएं सुचारु नहीं हो पा रहीं। पूर्व सत्रों में अप्रैल-मई माह में होने वाली वार्षिक गृह परीक्षाएं फरवरी में ही करानी होंगी। ऐसे में कक्षाओं की पढ़ाई के लिए अब ज्यादा मौका नहीं बचा है।
अरविंद प्रताप, रुक्मिणी श्रीवास्तवा, मोहन यादव, अमरजीत, सुधीर आदि अभिभावकों का कहना है कि इससे उनके बच्चों का नुकसान हो रहा है लेकिन सतर्क बच्चे अपने स्तर से तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। फ