बनकटी क्षेत्र में सड़क घूमते छुट्टा पशु।
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सूखे से किसी तरह फसल को बचाने वाले किसानों के लिए अब छुट्टा पशु संकट बन गए हैं। स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र में स्थापित पांच गोआश्रय स्थलों में से तीन बंद हैं। ऐसे में छुट्टा मवेशी घूमते-घूमते खेतों में पहुंचकर फसलों को क्षति पहुंचा दे रहे हैं।
छुट्टा मवेशियों की समस्या से निजात दिलाने के मामले में प्रशासन उदासीन बना बैठा है। उसका खामियाजा किसान, राहगीर व अन्य को भुगतना पड़ रहा है। किसानों के लिए मवेशी संकट बनकर उभरे हैं। किसान फसलें बचाने के लिए दिन-रात रखवाली कर रहे हैं।
इसके बावजूद, मवेशी कहीं न कहीं से नुकसान कर ही दे रहे हैं। स्थानीय किसान विजय शंकर पांडेय, बालकृष्ण शुक्ल, सियाराम शुक्ल आदि ने बताया कि अब धान की फसल में बालियां आने लगी हैं। अब यदि मवेशियों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया तो पूरी मेहनत बर्बाद हो जाएगी। प्रशासन छुट्टा मवेशियों से राहत दिलाए।
उल्लेखनीय है कि क्षेत्र के घुकसा, बाघापार, खरका, शोभनपार व मकदूमपुर में अस्थाई गो आश्रय स्थलों का निर्माण कराया गया है। इनमें घुकसा, खरका और बाघापार में गो आश्रय बंद पड़े हैं। शोभनपार में 20 तो मकदूमपुर में 27 छुट्टा मवेशी संरक्षित हैं। बाघापार निवासी रवि कुमार शुक्ल बताते हैं कि गोआश्रय स्थल को दोबारा संचालित कराने के लिए जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत भी की। बीडीओ ने ग्रामीणों के विरोध के चलते बंद करने की रिपोर्ट लगाकर जांच पूरी कर दी।
निचली सतह पर होने के कारण किया गया बंद
घुकसा व खरका निचली सतह और बाघापार के ग्रामीणों के विरोध के कारण बंद कर दिया गया। बारिश में घुकसा व खरका में पानी भर जाता था। सिरौता में एक बृहद गोआश्रय केंद्र का निर्माण अंतिम चरण में है। इसे अक्तूबर से शुरू किया जा रहा है। जल्द ही सभी छुट्टा मवेशी नए आश्रय स्थल पर नजर आएंगे।
- धनेश यादव, बीडीओ, बनकटी