इंटरनेट के जरिए मोबाइल पर खेले जाने वाले ऑनलाइन लुडो, तीन पत्ती, रमी, कलर डिसेंट, जंबो क्लिक, सेविंग सोसाइटी जैसे अनेक एप उपलब्ध हैं। इसे डाउनलोड करके कोई भी जीत-हार की बाजी लगा सकता है। इसमें सबसे बड़ा जोखिम यह है कि एप को चलाने और गेम में शामिल होने के लिए अपना बैंक खाता लिंक करना होता है। कई बार बिना चाहे खाते से रकम कट जाती है।
क्या कहते हैं आईजी
आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि आज के दौर में सबके हाथ में इंटरनेट और मोबाइल है। जिसमें तमाम इस तरह के एप आसानी से चल जाते हैं। इसमें ऑनलाइन गेमिंग एप भी चलते हैं। जिसे दूसरे प्रांत या देश से संचालित किया जाता है। इससे लोगों को रोकना पुलिस के लिए काफी मुश्किल काम है। हां, अगर कोई शिकायत करता है कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उस पर साइबर अपराध के तहत कार्रवाई की जाती है।
मनोचिकित्सक डॉ. एके दुबे बताते हैं कि जल्द ही कुछ बड़ा पाने के लिए लोग कई बार बड़े जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। यह एडिक्शन डिसऑर्डर है और इसके पीछे इन्फ्ल्यूएंसिंग एक बड़ा कारण है। ऑनलाइन गेम्स के प्रोमोटर खेल जगत और बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियां हैं जो लाखों लोगों के दिलों पर राज करती हैं।
ऐसे में लोग इन लोगों पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं। लाखों में किसी एक या दो को सफलता मिल भी जाती है तो लोग उसी तरह की सफलता पाने के लिए बार-बार जोखिम लेते हैं। यह एडिक्शन डिसऑर्डर बच्चों के साथ-साथ 35-40 साल तक के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। हाल ही में ऐसे मामलों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
साइबर विशेषज्ञ की राय
साइबर विशेषज्ञ अश्विनी कहते हैं कि जुए की लत लगाने वाले ऑनलाइन गेम्स से छात्र तो बिल्कुल ही दूर रहें। हालांकि बड़ों को भी खेलने का बहुत शौक है तो पहले उनके जोखिम समझ लें। कहीं ऐसा न हो कि आपकी सिर्फ जेब ही ढीली हो रही है। अगर लगातार हार रहे हैं तो सावधान व सतर्क हो जाएं। ठगी के शिकार होने से बचें।