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Cyber Crime: साहब बचाइए! ऑनलाइन गेम में हार गया घर की जमा पूंजी, अब आप ही कर सकते हैं मदद

Sat, 27 May 2023 03:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती

सार

मनोचिकित्सक डॉ. एके दुबे बताते हैं कि जल्द ही कुछ बड़ा पाने के लिए लोग कई बार बड़े जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। यह एडिक्शन डिसऑर्डर है और इसके पीछे इन्फ्ल्यूएंसिंग एक बड़ा कारण है। ऑनलाइन गेम्स के प्रोमोटर खेल जगत और बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियां हैं जो लाखों लोगों के दिलों पर राज करती हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बस्ती शहर के नरहरिया मोहल्ले का एक व्यक्ति पिछले दिनों एक पुलिस अधिकारी के जन सुनवाई के दौरान हाथ जोड़े हुए पहुंचा। रुंआसा चेहरा बनाए हुए बोला कि साहब! हमें बचा लीजिए। हमारा बेटा दिन-भर मोबाइल में जुआ खेलता है। घर की सारी जमा-पूंजी हार गया है। कई लोगों से उधार ले रखा है। अब वह लोग मांगने आते हैं...। धमकी भी देते हैं। अधिकारी ने उसे मदद का आश्वासन दिया।

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ऐसा ही एक फर्जी लूट का मामला कुछ महीने पहले आया था। जिसमें सोनहा थानाक्षेत्र का युवक ऑनलाइन लॉटरी में घर के 38 हजार रुपये हार गया था। कुछ दिन बाद सल्टौआ बैंक से रुपये निकालकर घर जाते समय उसने रास्ते में शोर मचा दिया कि बाइक सवार बदमाशों ने उसके रुपये लूट लिए। पुलिस ने संदेह होने पर जब कड़ाई से पूछताछ की तो बात खुल गई।

ये मामले उदाहरण मात्र हैं। ऐसे तमाम केस मिल जाएंगे, जिसमें जल्दी अमीर बनने का सपना देख रहे युवा ऑनलाइन लॉटरी में वक्त और पूंजी गंवा रहे हैं। उनके परिवार के लोग भी परेशान हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप जैसे सोशल साइट्स पर प्रचार के आकर्षित होकर जल्द अमीर बनाने का ख्वाब देखने लगते हैं।
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शहर के तमाम युवा ऐसे ऑनलाइन गेम में फंसकर न केवल अपनी पूंजी गंवा रहे हैं बल्कि कर्जदार भी बन रहे हैं। सबसे पेचीदा पहलू यह है कि ऐसे मामलों में पुलिस भी असहाय है। उनके परिवार के लोग अधिकारियों के पास गुहार लगा रहे हैं।

 

इस तरह के उपलब्ध हैं एप

इंटरनेट के जरिए मोबाइल पर खेले जाने वाले ऑनलाइन लुडो, तीन पत्ती, रमी, कलर डिसेंट, जंबो क्लिक, सेविंग सोसाइटी जैसे अनेक एप उपलब्ध हैं। इसे डाउनलोड करके कोई भी जीत-हार की बाजी लगा सकता है। इसमें सबसे बड़ा जोखिम यह है कि एप को चलाने और गेम में शामिल होने के लिए अपना बैंक खाता लिंक करना होता है। कई बार बिना चाहे खाते से रकम कट जाती है।

क्या कहते हैं आईजी
आईजी आरके भारद्वाज कहते हैं कि आज के दौर में सबके हाथ में इंटरनेट और मोबाइल है। जिसमें तमाम इस तरह के एप आसानी से चल जाते हैं। इसमें ऑनलाइन गेमिंग एप भी चलते हैं। जिसे दूसरे प्रांत या देश से संचालित किया जाता है। इससे लोगों को रोकना पुलिस के लिए काफी मुश्किल काम है। हां, अगर कोई शिकायत करता है कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है तो उस पर साइबर अपराध के तहत कार्रवाई की जाती है।

 
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कुछ बड़ा पाने के लिए लेते हैं जोखिम

मनोचिकित्सक डॉ. एके दुबे बताते हैं कि जल्द ही कुछ बड़ा पाने के लिए लोग कई बार बड़े जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। यह एडिक्शन डिसऑर्डर है और इसके पीछे इन्फ्ल्यूएंसिंग एक बड़ा कारण है। ऑनलाइन गेम्स के प्रोमोटर खेल जगत और बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियां हैं जो लाखों लोगों के दिलों पर राज करती हैं।

ऐसे में लोग इन लोगों पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं। लाखों में किसी एक या दो को सफलता मिल भी जाती है तो लोग उसी तरह की सफलता पाने के लिए बार-बार जोखिम लेते हैं। यह एडिक्शन डिसऑर्डर बच्चों के साथ-साथ 35-40 साल तक के लोगों में भी देखने को मिल रहा है। हाल ही में ऐसे मामलों में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है।
 
साइबर विशेषज्ञ की राय
साइबर विशेषज्ञ अश्विनी कहते हैं कि जुए की लत लगाने वाले ऑनलाइन गेम्स से छात्र तो बिल्कुल ही दूर रहें। हालांकि बड़ों को भी खेलने का बहुत शौक है तो पहले उनके जोखिम समझ लें। कहीं ऐसा न हो कि आपकी सिर्फ जेब ही ढीली हो रही है। अगर लगातार हार रहे हैं तो सावधान व सतर्क हो जाएं। ठगी के शिकार होने से बचें।
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