बर्खास्त दरोगा प्रकरण: पेशबंदी में नासूर बनता गया घाव
पीड़िता का आरोप, उसके साक्ष्यों, तथ्यों को नहीं लिया संज्ञान
31 जुलाई तक सभी मुकदमों के प्रगति व गुणवत्ता की होगी समीक्षा
31 मार्च से सुर्खियों में छाया रहा बहुचर्चित मनचले दरोगा का प्रकरण
सोमवार को तीसरी बार मामले की जांच करने पहुंचे थे जोन के एडीजी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महिला से अश्लील चैट करने के चलते नौकरी गंवा चुके दरोगा का प्रकरण पेशबंदी में यहां तक पहुंचा। पीड़िता का स्पष्ट आरोप है कि उसके साथ सिर्फ बर्खास्त दरोगा ने ही नहीं, सभी जांचकर्ताओं ने दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाया। लेकिन विवेचक ने बाकी सबको आरोपों से बरी कर दिया। मंगलवार को पीड़िता ने बताया कि उसके पक्ष को न तो गौर से सुना-समझा गया और न ही उसके दिए गए साक्ष्य और तथ्यों को गंभीरता से लिया गया। कहना है कि भले ही उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों की तफ्तीश संतकबीरनगर के क्राइम ब्रांच को सौंपी गई, लेकिन वहां से भी इंसाफ नहीं मिला। इसलिए उसने मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगाने पहुंची। एडीजी अखिल कुमार का कहना है कि 31 जुलाई तक सभी मुकदमों की समीक्षा करके आवश्यक कार्रवाई कर दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। 31 मार्च 2020 से शुरू हुए इस मामले में पीड़िता व उसके परिवारवालों पर कुल 10 मुकदमे दर्ज किए गए। जिनमें दो मुकदमे 13 जून की घटना के पहले दर्ज कराए गए थे। 13 जून 2020 को गांव में जमीन पैमाइश के दौरान हुए विवाद के बाद एक-एक करके आठ मुकदमे दर्ज किए गए। जिनमें पैमाइश करने गई राजस्व टीम को बंधक बनाकर जानलेवा हमला करने तक के मामले शामिल हैं। इन 10 मुकदमों में दो मुकदमे खारिज किए जा चुके हैं। बाकी आठ को भी महिला निराधार बताती है। वहीं पुलिस का कहना है कि पैमाइश के दौरान महिला व उसके परिवार वालों ने दरोगा और राजस्व कर्मियों को बंधक बना लिया था। गांववालों का कहना है कि मुंह की खाने से तिलमिलाई पुलिस ने महिला के विपक्षी से तहरीर लेकर कई मुकदमे दर्ज किए। इन्हीं मुकदमों को फर्जी बताते हुए महिला एफआर लगाने की अब मांग कर रही है। उधर बंधक बनाए गए दरोगा और राजस्व कमियों को छुड़ाने पहुंची कोतवाली और महिला थाने की टीम पर पीड़िता महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अलग मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें विवेचना के दौरान सभी को जांच अधिकारी ने बरी कर दिया है।