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बुखार चढ़ते ही भाग रहे डेंगू की जांच कराने

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बुखार चढ़ते ही भाग रहे डेंगू की जांच कराने
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बस्ती। जिले में शहर से लेकर गांवों तक डेंगू का खौफ दिख रहा है। मौसम के रुख में आए बदलाव से बुखार पीड़ितों की तादाद बढ़ी है। इसी के साथ डेंगू की जांच कराने वालों की भी संख्या में इजाफा हुआ है। हालत यह है कि बुखार चढ़ते ही लोग डेंगू की जांच कराने पहुंच जा रहे। इसे देखते हुए स्वास्थ्य महकमे ने सतर्कता बढ़ा दी है।
शहर की प्रह्लाद कॉलोनी निवासी 27 वर्षीय मनीष यादव पुलिस विभाग में सिपाही हैं। इन्हें लखनऊ में 24 अक्तूबर को तेज बुखार हुआ। वहीं इलाज कराया, मगर बुखार नहीं उतरा। उसके बाद वह घर चले आए। यहां उन्होंने जब जांच कराई तो उनका प्लेटलेट्स तो कम था, मगर डेंगू की रिपोर्ट निगेटिव आई। उसके बाद वे निजी चिकित्सालय में इलाज कराने गए। वहां चिकित्सक ने उन्हें डेंगू बताया और जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। वह जिला अस्पताल में भर्ती हैं।
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वाल्टरगंज निवासी रामअवध को करीब एक सप्ताह पहले तेज बुखार हुआ। डेंगू की रिपोर्ट निगेटिव थी, मगर प्लेटलेट्स कम थे। चिकित्सक ने बताया कि उन्हें वायरल फीवर हो गया है, जिसके कारण कभी कभार प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। फिलहाल वह निजी अस्पताल में ही इलाज करा रहे हैं।
शहर के रौता गांव निवासी मनोज कुमार को 22 अक्तूबर को तेज बुखार के साथ उल्टी आने लगी। चिकित्सक ने तत्काल उन्हें डेेगू जांच की सलाह दी। जिला चिकित्सालय में उन्होंने जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आ गई। उसके बाद वायरल फीवर का इलाज करा रहे हैं।
जिले में अक्तूबर से अब तक डेंगू के 44 मरीज मिल चुके हैं। हालांकि, इनमें से अधिकांश ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्र बताते हैं कि औसतन हर दिन सौ से ज्यादा लोगों की जांच कराई जा रही है। डेंगू पीड़ितों के इलाज की व्यवस्था सीएचसी-पीएचसी के अलावा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में कराई गई है।
सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र का कहना है कि डेंगू को देखते हुए स्वास्थ्य प्रशासन सतर्क है। सभी केंद्रों पर जांच की व्यवस्था है। किट से जांच में जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है, उन्हें तत्काल भर्ती कर लिया जा रहा है। डेंगू की सबसे सटीक जांच एलाइजा से होती है।
यहां है इलाज की व्यवस्था
जिला चिकित्सालय में दस तो मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में दस बेडों वाला वार्ड तैयार है। मेडिकल कॉलेज में बच्चों के लिए अलग से भी वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा सीएचसी पर चार शैय्या तो पीएचसी पर तीन बेड वाला वार्ड है। सीएचसी-पीएचसी में ये वार्ड इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटरों में बनाए गए हैं।
नगर पालिका क्षेत्र में वार्डवार छिड़काव व फागिंग पर दो लाख खर्च
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी दुर्गेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि शहरी क्षेत्र में वार्डवार छिड़काव व फागिंग की व्यवस्था बनाई गई है। छोटी मशीनों से फागिंग कराई जा रही है। बताया कि अब तक दो लाख रुपये का डीजल फागिंग पर खर्च किए गए हैं। कहा कि अब मच्छरों का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा है। मौसम बदलने के साथ ही मच्छर कम हो सकते हैं।
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डेंगू हो तो तत्काल हो जाएं भर्ती
जिला चिकित्सालय के एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने कहा कि अस्पताल के वार्ड में अभी चार मरीज भर्ती हैं। चूंकि यह रोग संचारी है। ऐसे में डेंगू पीड़ित को चाहिए कि जैसे ही उसकी रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आए, तत्काल उसे चिकित्सक से इलाज कराकर भर्ती हो जाना चाहिए। डेंगू के वायरस बच्चों व बुजुर्गों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। ऐसे में जैसे ही बुखार हो, तत्काल इलाज कराएं।
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