बस्ती। सैकड़ों रुपये टोल भरने के बावजूद हिचकोले खाते हुए यात्रा करने की विसंगति झेलनी हो तो अयोध्या-गोरखपुर फोरलेन पर आइए।
अपनी उम्र पूरी कर चुकी राम की नगरी अयोध्या से सीएम सिटी को जोड़ने वाले इस हाईवे पर आप 80-100 की स्पीड में फर्राटा भरने की सोच रहे हैं तो जरा रुक जाइए। ऐसा करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। सड़क के बीचो-बीच बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। इनमें अचानक कार का पहिया गिरा तो तय मानिए गाड़ी को संभालना मुश्किल हो जाएगा। गड्ढों से बचने के लिए एकाएक स्टेयरिंग कट मारेंगे तो बगल की लेन में चल रहे दूसरे वाहन से टक्कर होने में देर नहीं लगेगी। इसलिए भलाई इसी में है कि भूल जाइए कि आप फोरलेन पर चल रहे हैं। तभी सुरक्षित मंजिल तक पहुंचने की उम्मीद कीजिएगा।
वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुई इस फोरलेन ने अपनी निर्धारित 15 वर्ष की उम्र पूरी कर ली है। कायदे से इसे तोड़कर दोबारा बनाया जाना चाहिए। मगर जहां गड्ढे बड़े हो जाते हैं, वहां गिट्टियां भरकर पैबंद लगाकर काम चलाया जा रहा है। हालत यह है कि कार हो या ट्रक-बस, लहराते हुए चलती हैं।
अमर उजाला की टीम ने इस रोड की पड़ताल की तो हैरान कर देने वाली तस्वीर देखने को मिली। टीम ने हर्रैया से बस्ती के बीच 26 किलोमीटर के गड्ढों की गिनती की, जिसमें 155 ऐसे गड्ढे मिले जिनमें स्पीड में टायर गिरने पर गाड़ी में कुछ न कुछ नुकसान तय है। टायर फट सकता है या शॉकर-कमानी या चेसिस तक टूट सकती है। रफ्तार में ऐसा होने का मतलब गाड़ी अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकती है। यह हालत तब है, जब एक महीने पहले ही यानी मई-जून में अयोध्या से गोरखपुर तक की सड़क की मरम्मत हुई है। बाकायदा लेन बंद करके हॉट मिक्स मैटीरियल डालकर लेपन किया गया था, लेकिन पहली बारिश में ही मरम्मत के गुणवत्ता की कलई खुल गई।
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सबसे ज्यादा संसारीपुर के पास गड्ढे
- हर्रैया से बस्ती के बीच की बात करें तो सबसे ज्यादा 32 गड्ढे संसारीपुर के पास बन गए हैं। रजौली के पास 29, रमवापुर के पास 17, गड़हा गौतम के पास 24, तिलकपुर के पास 13, गोटवा के पास 19 गड्ढे बन गए हैं। इतना ही नहीं, हर्रैया तहसील के सामने 12 और तेनुआ के पास नौ गड्ढे राहगीरों का इम्तिहान ले रहे हैं।
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हर मिनट गुजरते हैं 17 वाहन
सूबे को पूरब से पश्चिम को जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण एनएच-28 फोरलेन पर 24 घंटे आवाजाही बनी रहती है। दूरदराज के छोटे-बड़े वाहनों के अलावा जिले के लोग भी बाइक, कार आदि लेकर गुजरते रहते हैं। आंकड़ों के अनुसार 24 घंटे में औसतन 25 हजार वाहन इस मार्ग से होकर गुजरते हैं। यानी हर मिनट में 17 से अधिक वाहन गुजर जाते हैं। इस सड़क पर छह महीने में 68 बाइक हादसे हो चुके हैं। इनमें 17 लोगों की मौत हो चुकी है। 59 बाइक सवार घायल हो चुके हैं। कार व ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे से टक्कर व साइड लगने की 19 घटनाएं हो चुकी हैं।
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लगभग समाप्त हो चुकी है सड़क की लाइफ
ओवरलोड वाहन और ओवरलोड ट्रैफिक के कारण सड़कें टूट रही हैं। इस सड़क की लाइफ भी लगभग समाप्त हो चुकी है। चूंकि यह रोड सिक्सलेन के लिए प्रस्तावित था, इसलिए तब तक ऐसे ही मरम्मत करके काम चलाया जा रहा है। जल्द ही ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही ताकि यात्रियों को सुखद ड्राइविंग की अनुभूति हो सके।
-ज्ञानेंद्र कुमार, आरई, एनएचएआई