जल जीवन मिशन अधूरा, कहीं चहारदीवारी नहीं तो कहीं बोरिंग का इंतजार
50 प्रतिशत परियोजनाएं भी पूरी नहीं, 855 में से सिर्फ 127 पर हुआ कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बार-बार चेतावनी के बाद भी जल जीवन मिशन अधूरा रह गया। पांच साल बीत गए। मगर, अब तक जिले के अधिकतर गांवों में हर घर पानी नहीं पहुंचा है। मिशन की 50 प्रतिशत परियोजनाएं पूर्ण नहीं हो पाई हैं। अब तक 2578 गांवों को इस योजना से आच्छादित हो जाना था। इसके लिए 855 परियोजनाएं स्वीकृति हुई थीं। इसमें सिर्फ 127 परियोजनाएं पूरी हुई हैं। 728 परियोजनाएं आधी-अधूरी है। कहीं चहारदीवारी का कार्य शेष है तो कुछ बोरिंग एवं पाइप लाइन बिछने के इंतजार में हैं।
शासन के निर्देश पर इन परियोजनाओं को मार्च 2024 तक पूर्ण कर हर घर नल से जल पहुंचाना था। इसके लिए डीएम एवं कमिश्नर स्तर से बार कार्यदायी एजेंसी तथा निर्माण कंपनी को बार-बार चेतावनी दी गई। जिन जगहों पर जमीन विवाद थे, वहां एसडीएम स्तर के अधिकारी खुद हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
बावजूद इसके परियोजनाओं के कार्य में तेजी नहीं आ सकी है। निर्माण के लिए तीन अलग-अलग कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। 15 अगस्त 2019 को परियोजनाओं का शुभारंभ कर दिया गया था। पांच साल बीतने को हैं। मगर, इन परियोजनाओं के पूर्ण होने का मुहूर्त नहीं आया है।
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इन कंपनियों को मिला है निर्माण का जिम्मा
हैदराबाद की मेघा कंपनी को सर्वाधिक 1941, हैदराबाद की ही वोसरए कंपनी को 307 व नेयहा की जब्रान कंपनी को 303 गांवों में पेयजल परियोजनाओं को पूर्ण करने की जिम्मेदारी मिली है। प्रत्येक परियोजना की लागत 50 लाख रुपये से अधिक की है। इसमें 500 से 1000 केएल क्षमता की पानी की टंकी, मोटर, स्टॉफ रूम, चहारदीवारी और पाइप लाइन बिछाने के बाद घर-घर कनेक्शन देना था। मेघा कंपनी ने महज तीन परियोजनाएं पूर्ण की है। वोएसए ने 27 परियोजना को पूर्ण किया है। जक्शन कंपनी ने एक भी परियोजना पूर्ण नहीं की है।
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शुद्ध पेयजल के लिए साल भर करना पड़ेगा इंतजार
बभनान। कस्बे में शुद्ध पेयजल के लिए अभी एक साल तक और इंतजार करना होगा। यहां 20 करोड़ की प्रस्तावित परियोजना की टेंडर प्रक्रिया ही बहुत देरी से हुई। चार महीने के दौरान यहां केवल दो बोरिंग का कार्य पूरा हुआ है। एक बोरिंग का ट्रायल होना बाकी है।
60 मीटर ऊंची पानी की टंकी के निर्माण का फाउंडेशन स्तर का कार्य हो पाया है। दूसरी पानी की टंकी की नींव नहीं पड़ी है। अमृत योजना- 02 कार्यक्रम के तहत नगर पंचायत के सभी घरों को शुद्ध पेयजल योजना से जोड़ा जाना है। नगर पंचायत क्षेत्र को तीन जोन में बांटा गया है। रेलवे लाइन का उत्तरी हिस्सा पहला जोन है। यहां आठ लाख लीटर क्षमता की पानी की टंकी लगाई जाएगी, दो मोटर के अलावा दो पंप हाउस भी बनाए जाएंगे।
रेलवे लाइन के दक्षिण हिस्से को दो जोन में बांटा गया है। एक जोन में तीन लाख लीटर क्षमता की टंकी के अलावा यहां दो मोटर व पंप हाउस बनाए जाएंगे। दूसरे जोन में पुरानी पेयजल को चालू कराया जाएगा। इसके तहत लोहिया नगर वार्ड में 1100 केएल क्षमता की टंकी के निर्माण के अलावा व दो ट्यूबवेल लगाए गए हैं। मगर, यह परियोजना अभी नगर पंचायत बभनान को हैंडओवर नहीं हो सकी हैं।
जल निगम के अवर अभियंता नगरीय विवेक मौर्य ने बताया कि अमृत योजना-02 के तहत नगर पंचायत के 5897 घरों में पानी का कनेक्शन दिया जाना है। कुल 85 किमी पाइप लाइन बिछाई जाएगी। एक साल में यह परियोजना पूरी होने की उम्मीद है। संवाद
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मड़वानगर में नहीं पहुंचा घरों में कनेक्शन
शहर के रौतापार मोहल्ले के लिए अमृत योजना के तहत मड़वानगर में पानी की टंकी के निर्माण के साथ पाइप लाइन बिछाई गई थी। मगर, यहां अब तक घर-घर कनेक्शन नहीं पहुंचाया गया है। इससे मोहल्ले वासियों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। यहां लीकेज की समस्या के चलते नागरिकों ने विरोध भी जताया था। इसे ठीक तो करा दिया गया। मगर, कनेक्शन अधिकतर घरों तक नहीं पहुंचाया गया है।
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चयनित गांव- 2578
प्रस्तावित परियोजनाएं- 855
संचालित परियोजनाएं- 127
चालू होने वाली परियोजनाएं- 133
नियमित जलापूर्ति वाले गांव- 252
जलापूर्ति के लिए तैयार गांव- 368
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कोट
पेयजल परियोजनाओं का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। शहरी क्षेत्र में कनेक्शन देकर आपूर्ति चालू कर दी गई है। कुछ जगहों पर कनेक्शन बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जिन जगहों पर कार्य अभी बाकी है, उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा।
-रेहान फारूकी, एक्सईएन, जलनिगम