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Basti News: 42 करोड़ घपले के मामले में ठेकेदारों से शुरू हुई रिकवरी, 50 लाख जमा

Tue, 19 Dec 2023 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। वर्ष 2018-19 में पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में 42 करोड़ के घपले के मामले में ब्लैक लिस्ट किए गए श्रेणी ए एवं बी के 40 ठेकेदारों से विभाग ने रिकवरी की कार्रवाई शुरू कर दी है। काली सूची जारी होते ही इन ठेकेदारों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में रिकवरी की धनराशि जमा की जाने लगी। अभी तक 30 ठेकेदारों ने लगभग 50 लाख की धनराशि विभागीय हेड में जमा कर दिया है।
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पूरे प्रकरण में मेसर्स गोविंद माधव के प्रोपराइट संतोष पांडेय और एटी कांस्ट्रक्शन की प्रोपराइटर रंजना श्रीवास्तव समेत दो ठेकेदारों को पहले ही क्लीन चिट दे दी गई है। इसके बाद शेष 38 ठेकेदारों पर भी विभाग ने शिकंजा कसा। काली सूची से उबरने के लिए इन ठेकेदारों ने अपने ऊपर लगाए गए रिकवरी की धनराशि जमा करनी शुरू कर दी है। इसके बगैर इनके पंजीयन की बहाली नहीं हो सकेगी। अभी आठ ठेकेदारों ने रिकवरी की धनराशि नहीं जमा की है। विभाग ने इनसे भी वसूली की प्रक्रिया तेज कर दिया है। रिकवरी की धनराशि जमा करने वाले ठेकेदारों को विभाग की तरफ से क्लीन चिट दिए जाने की उम्मीद बढ़ गई है।
तत्कालीन एक्सईएन और दो सहायक अभियंता हो चुके हैं बर्खास्त
42 करोड़ के घपले के मामले में पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के तत्कालीन एक्सईएन, दो सहायक अभियंता पहले ही पद्च्यूत किए जा चुके हैं। 13 अवर अभियंताओं पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। मगर इस मामले में ठेकेदार कार्रवाई से वंचित रखे गए थे। 28 अक्तूबर को जनपद भ्रमण पर आए लोक निर्माण मंत्री के समक्ष सांसद ने ठेकेदारों पर कार्रवाई न होने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। इसी के बाद ठेकेदारों पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई। इसमें शामिल दो ठेकेदारों का कारण बताओं नोटिस 20 जून को प्रमुख अभियंता स्तर से समाप्त होने के कारण उन्हें कार्रवाई की जद से बाहर कर दिया गया था। जबकि ए, बी, सी एवं डी श्रेणी के 38 ठेकेदारों को कार्रवाई की जद में रखा गया था। कार्रवाई से बचने के लिए इन ठेकेदारों ने भी रिकवरी का धन जमा करने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
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मनमाने ढंग से कर दिया गया था भुगतान
वर्ष 2018 से पूर्व पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड में विभिन्न मदों में उपलब्ध धन को सड़क निर्माण के नाम पर निकाल लिया गया था। शासन स्तर से इन कार्यों की अनुमति भी नहीं ली गई थी। मामला पकड़ में आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। इसमें तीन विभागीय अधिकारी बर्खास्त किए जा चुके हैं। जबकि 13 अवर अभियंताओं पर कार्रवाई प्रक्रियाधीन बताई जा रही है। गाेलमाल का यह मामला अभी तक ठंडा नहीं हुआ है।
पूरे प्रकरण में नहीं फंसा कोई बाबू
42 करोड़ घपले के प्रकरण में एक्सईएन से लेकर एई, जेई और ठेकेदार कार्रवाई की जद में आते गए। हैरत की बात है कि इस मामले में एक भी विभागीय बाबू कार्रवाई की जद में नहीं आ सके। जबकि निर्माण कार्य के चयन से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में बाबू, लेखाकार एवं अन्य कर्मचारियों की अहम भूमिका होती है। सूत्रों की मानें तो इस गोलमाल का ताना बाना विभाग के एक बाबू ने बुना था। मगर अभिलेख में उसने खुद के सम्मिलित होने का साक्ष्य नहीं छोड़ा। विभागीय अभिलेख में अधिकारी और ठेकेदार ही संलिप्त पाए गए। इसीलिए विभागीय कर्मचारी इस मामले से बरी हो गए।
ठेकेदारों से रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। काली सूची में शामिल 30 ठेकेदारों से रिकवरी कर ली गई है। शेष ठेकेदारों से भी वसूली का प्रयास चल रहा है।
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-केशवलाल, एक्सईएन,
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड।
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