केंद्रों पर नहीं चस्पा की गई है सेवा शुल्क की सूची
मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं, नागरिक होते है, परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में 1200 से अधिक जनसेवा केंद्र हैं। इन पर काम छोटा हो या बड़ा, दाम जनसेवा केंद्र संचालक के मन मुताबिक देना पड़ता है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए इन केंद्रों पर आवेदन करने का शुल्क निर्धारित है, लेकिन संचालक इसे मानते नहीं हैं। ऐसे में नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
लोगों का आरोप है कि जनसेवा केंद्रों की मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं है और न ही उनकी सुनवाई होती है। नाई की दुकान, खाना-पान के ठेले, यहां तक सार्वजनिक शौचालयों में भी एक रेटलिस्ट लगी रहती है, लेकिन इन केंद्रों पर सेवा शुल्क की कोई सूची चस्पा नहीं है। नियमानुसार, आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कराने पर 30 रुपये शुल्क निर्धारित है, लेकिन जनसेवा केंद्र संचालक 50 से 150 रुपये तक वसूल लेते हैं।
समक्ष व्यक्ति हंसी-खुशी शुल्क दे देता है, लेकिन वृद्धावस्था, विधवा व पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवेदन कराने वाले मन मसोसकर रह जाते हैं। बुजुर्गों से लेकर विद्यार्थी तक सभी इसका शिकार हो रहे हैं।
हर्रैया क्षेत्र के बेनीपुर निवासी किसान सूरज कश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना में लाभ के लिए ई-केवाईसी करानी पड़ रही है। लोग बताते हैं कि जनसेवा केंद्र पर यह निशुल्क हो रही है, लेकिन बभनान में ई-केवाईसी कराने पर 100 रुपये ले लिए गए।
...
भिरिया स्थित जनसेवा केंद्र पर आय व जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कराने गया था। केंद्र संचालक ने प्रत्येक के लिए 100 रुपये ले लिए।
-बाबूराम, धौरपारा
...
भिरिया जनसेवा केंद्र पर शुक्रवार को आय व जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए गया था। प्रमाणपत्र ऑनलाइन बनवाने के लिए केंद्र संचालक ने 200 रुपये लिए हैँ।
-राम मिलन, सेखुई
...
नागरिकों को तक सरकारी सेवाएं पहुंचाना है उद्देश्य
जनसेवा केंद्रों का उद्देश्य नागरिकों तक सरकार की योजनाओं का लाभ कुशल व प्रभावी ढंग से पहुंचाना है। इसका क्रियान्वयन पीपीपी (सार्वजनिक-निजी साझेदारी) मॉडल से किया जा रहा है। जनसेवा केंद्रों से ई-कॉमर्स, बैंकिंग, बीमा, टिकट बुकिंग आदि सुविधाएं दी जाती हैं। शहरी क्षेत्र में 10 हजार और प्रत्येक पंचायत में एक जनसेवा केंद्र का होना जरूरी है। ई-डिस्ट्रिक पोर्टल पर 36 विभागों की 259 सेवाएं उपलब्ध हैं।
...
कोट
जनसेवा केंद्र में निर्धारित शुल्क से ज्यादा की मांग की जा रही है तो इसकी शिकायत की जा सकती है। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में ई-गवर्नेंस सोसायटी का संचालन होता है। जनसेवा केंद्रों में निर्धारित शुल्क की सूची लगाना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया जा रहा है तो अभियान चलाकर जांच की जाएगी।
सौरभ, ई-डिस्ट्रिक मैनेजर