संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मौसम बदल रहा है। ऐसे में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यहां वहां पानी जमा होने के कारण मच्छर बढ़ रहे हैं। शहर के 14 नालों की सफाई न होने के कारण पानी का बहाव रुक गया है। इससे नालियों का पानी ओवरफ्लो हो गया है। कई मोहल्लों में पानी एकत्रित हो रहा है। जल जमाव के चलते कई प्रकार की दिक्कतें बढ़ रही हैं।
मच्छरों की प्रकोप के बावजूद शहर में न तो कहीं फाॅगिंग हो रही है, और न ही एंटी लार्वा का छिड़काव ही हो रहा है। यही नहीं सफाई का दावा करने के बावजूद इधर-उधर कूड़े के ढेर लगे हैं। अमर उजाला टीम ने शनिवार को शहर के मालवीय रोड व गांधी नगर क्षेत्र की नालियां व सफाई व्यवस्था को जाना। यहां गांधी नगर में त्रिपाठी गली में शहर के बीचो बीच कूड़े का ढेर मिला, तो यही हाल पचपेडिया रोड पर भी रहा। मालवीय रोड के नाले में पानी ऊपर तक पहुंच गया है, जबकि नालियां ओवरफ्लो होने के कारण सड़क पर फैलने लगा है।
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यहां नाला सफाई पर खर्च हो गया 18 लाख
शहर के नाले भले ही चोक हैं, मगर पालिका ने पिछले साल इसकी सफाई पर 18 लाख रुपये खर्च कर दिए गए हैं। साल में एक बार हुई सफाई के कुछ ही दिनों बाद नालों में कूड़ा करकट एकत्रित हो गया है, और धीरे-धीरे नाले के पानी का बहाव करीब-करीब ठप हो गया है। नगर पालिका के ईओ दुर्गेश्वर दत्त त्रिपाठी ने कहा कि अप्रैल में नाले की सफाई कराई जाएगी।
मौसम बदला, मच्छर बढ़े, फाॅगिंग की अभी तैयारी नहीं
मच्छरों का प्रकोप इन दिनों तेज हो गया है। मलेरिया विभाग के अधिकारियों के अनुसार तो यह मच्छर बीमारी वाले नहीं हैं, मगर मच्छरों का प्रकोप रोकने के लिए नालियों व गलियों की सफाई हो और कूड़ों का निस्तारण ठीक ढंग से किया जाना जरूरी है। नगर पालिका के अधिकारियों के अनुसार अभी फाॅगिंग व छिड़काव के लिए कोई रणनीति नहीं बनी है। अप्रैल में हर साल की तरह मच्छररोधी अभियान चलाया जाएगा।
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जिला मलेरिया विभाग मुहैया कराता है फाॅगिंग व एंटी लार्वा की दवा
जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी ने बताया कि फाॅगिंग व एंटी लार्वा की दवा विभाग मुहैया कराता है, जबकि छिड़काव व फाॅगिंग के लिए पेट्रोल व डीजल नगर पालिका देती है। नगर पालिका की ही जिम्मेदारी है कि फाॅगिंग कराए।
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नगर पालिका में केवल दो मशीन
शहर के 25 वार्डों की फाॅगिंग के लिए पालिका के पास संसाधन के नाम पर मात्र दो बड़ी मशीन है। इसके अलावा स्थायी व अस्थायी 250 सफाई कर्मी हैं, मगर नालों के बहाव अवरुद्ध होने के कारण नालियों का पानी कई जगह एकत्रित है। इसके नाते नालियां ओवरफ्लो हो गई हैं।
फाॅगिंग व एंटी लार्वा छिड़काव पर 15 लाख हर माह होता है खर्च
शहरी क्षेत्र के 1.26 लाख की आबादी को मच्छरों से राहत दिलाने के लिए हर माह 15 लाख रुपये डीजल व पेट्रोल तथा अन्य संसाधनों के प्रयोग में खर्च किए जाते हैं, मगर मच्छर हैं कि अभी तेजी से बढ़ रहे हैं। नाला, नालियों की सफाई की तिथि अभी तय नहीं है।
जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी ने कहा कि मौसम के चलते मच्छर बढ़ गए हैं। इससे बचाव के लिए सभी को उपाय करना चाहिए। यहीं नहीं इस मौसम में खानपान का खासा ध्यान रखना जरूरी है।
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क्या न खाएं
बासी भोजन न करें, ज्यादा तले भुने खाद्य पदार्थों का प्रयोग न करें, बाहर के खाने से परहेज करें, खुले में रखी खानपान की सामग्री के प्रयोग से बचें, इस मौसम में कटे फल का उपयोग कतई न करें।
क्या खाएं
ताजा भोजन करें, खाने से पहले हाथ साबुन से जरूर धुलें, स्वच्छ पानी का ही सेवन करें, फल को तत्काल काट कर खाएं, नालियों व नालों के पास सजी खानपान की दुकानों के खाद्य सामानों का प्रयोग कतई न करें।
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सफाई की व्यवस्था को चाक चौबंद किया गया है। कूड़ों को व्यवस्थित करने के लिए स्थान निर्धारित है। यदि इधर-उधर इसका निस्तारण किया जा रहा है, तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। बारिश के पहले नाले नालियों की सफाई करा दी जाएगी। जेसीबी से नालों की सफाई कराई जाएगी।
-दुर्गेश्वर दत्त तिवारी, ईओ, नगर पालिका परिषद